मुरादाबाद: समझौते की बेदी पर चढ़ी मूंढापांडे पुलिस की संवेदनशीलता
मुरादाबाद, अमृत विचार। दो ग्रामीणों की मौत का गुनहगार मानते हुए मूंढापांडे पुलिस ने बिजली विभाग के जिन चार कर्मचारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया है, वह गंभीर धाराओं में अभियोग पंजीकृत होने के दस दिन बाद भी खुलेआम घूम रहे हैं। हत्यारोपियों की गिरफ्तारी की बजाय संवेदनहीन पुलिस की नजर …
मुरादाबाद, अमृत विचार। दो ग्रामीणों की मौत का गुनहगार मानते हुए मूंढापांडे पुलिस ने बिजली विभाग के जिन चार कर्मचारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया है, वह गंभीर धाराओं में अभियोग पंजीकृत होने के दस दिन बाद भी खुलेआम घूम रहे हैं। हत्यारोपियों की गिरफ्तारी की बजाय संवेदनहीन पुलिस की नजर समझौते पर टिक गई है। इंसाफ का रास्ता अख्तियार करने की बजाय समझौते के मार्ग की पुलिसिया तलाश खाकी की संवेदनशीलता व कार्यप्रणाली पर एक साथ सवाल खड़ा करती है।
- दर्दनाक दो मौतों के गुनहगार घूम रहे खुलेआम
- गिरफ्तारी के सवाल पर पुलिस ने साधी चुप्पी
मूढापाण्डे थाना क्षेत्र में मिलक मनकरा गांव की रहने वाली नीतू व मंजेश ने 22 जून को तहरीर दी। दोनों महिलाओं ने बताया कि 21 जुलाई की रात करीब साढ़े दस बजे ट्रैक्टर- ट्राली की ठोकर से गांव में सड़क किनारे खड़ा बिजली का खम्बा टूट गया। इससे बिजली के तार टूट गए। बिजली विभाग के जेई भीतखेड़ा व एक्सचियन रोहताश सिंह देर रात मौके पर पहुंचे। ट्रैक्टर- ट्राली चालक से आरोपियों ने दस हजार रुपये की उगाही की और चलते बने। कुछ देर बाद नशे में धुत लाईन मैन जाने आलम व जगत पाल मौके पर पहुंचे।
दोनों ने तार जोड़ने में चूक करते हुए हाईटेंशन करंट का प्रवाह गांव में करा दिया। हाईबोल्टेज करंट की चपेट में आने से उनके पतियों क्रमश: नन्हू व डोरी लाल की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे से हतप्रभ ग्रामीण देर रात से ही बिजली विभाग व पुलिस से संपर्क साधने की कोशिश करते रहे। दोनों महकमों की नींद दूसरे दिन तब टूजी, जब ग्रामीण शव साथ लेकर एनएच 24 पर पहुंचे। प्रशासनिक अफसरों की मान मन्नौव्वल के बाद ग्रामीण तब माने, जब पुलिस ने बिजली विभाग के जेई व एक्सचियन समेत कुल चार कर्मचारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया। मुकदमा दर्ज हुए दस दिन गुजर गए हैं। फिर भी बिजली विभाग के चारों कर्मचारियों में से किसी की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो पाई है। जबकि चारों आरोपी बाकायदा ड्यूटी कर रहे हैं।
गिरफ्तारी के मुद्दा कुरेदने पर मूंढापांडे पुलिस का जवाब चौंकाने वाला है। पुलिस की मानें तो ग्रामीणों के आक्रोश से उपजे हालात से पार पाने की कवायद में मुकदमे की कार्रवाई की गई। जबकि दोनों ही पक्षों में समझौते की बुनियाद मुकदमा लिखे जाने से पहले ही तब पड़ चुका था, जब बिजली विभाग के अधिकारियों ने पीडि़त परिवार को मौके पर ही दो लाख रुपये का भुगतान कर दिया।
इससे पुलिस को उम्मीद बंध गई कि आने वाले वक्त में मुकदमा देर तक नहीं टिकेगा। दोनों पक्ष आपस में समझौता कर लेंगे। पुलिस की धारणा से यह संभावना प्रबल हो गई है कि नशे में धुत लाइनमैनों की बड़ी चूक व बिजली विभाग के दो बड़े अधिकारियों पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से पर्दा उठना मुमकिन नहीं होगा। क्योंकि पुलिस का मूड भी समझौते के पलड़े की तरफ ही झुका हुआ है। महकमे के उच्चाधिकारी तक चुप्पी की चादर ओढ़ कर बैठे हुए हैं।
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