मजबूत साझेदारी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत-ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय संबंधों को नए मुकाम पर लाने पर खासा जोर दिया है। रविवार से शुरु हुई केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी की छह दिवसीय ऑस्ट्रेलिया यात्रा से दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों विशेष रूप से महत्वपूर्ण खनिजों, कोयला, खनन, रक्षा, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, नई प्रौद्योगिकियों, कृषि अनुसंधान और साइबर …
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत-ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय संबंधों को नए मुकाम पर लाने पर खासा जोर दिया है। रविवार से शुरु हुई केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी की छह दिवसीय ऑस्ट्रेलिया यात्रा से दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों विशेष रूप से महत्वपूर्ण खनिजों, कोयला, खनन, रक्षा, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, नई प्रौद्योगिकियों, कृषि अनुसंधान और साइबर सुरक्षा में व्यापक सहयोग के लिए मार्ग प्रशस्त होगा। बदलती भू-राजनीति को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया और भारत एक मजबूत साझेदारी बनाने की ओर बढ़ रहे हैं।
यानि ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच साझेदारी अब ऊपरी स्तर पर नहीं है। ऑस्ट्रेलिया और भारत के द्विपक्षीय संबंधों में ‘नये अध्याय’ की शुरुआत हो चुकी है। इस भागीदारी का लक्ष्य दोनों देशों के लिए लाभदायक साझेदारी के उद्देश्य से असली प्रतिबद्धताओं और प्रक्रियाओं को बनाना है। इससे पहले फरवरी माह में ऑस्ट्रेलिया-भारत के विदेश मंत्रियों के बीच शुरुआती साइबर संवाद में निवेश के लिए मज़बूत अवसरों और साइबर, महत्वपूर्ण एवं उभरती तकनीकों में अत्याधुनिक आविष्कार को और बढ़ावा देने पर ध्यान दिया गया।
अप्रैल माह में भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने आशा जताई थी कि हमारी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करने की बहुत क्षमता है। समझौते के आधार पर साथ मिलकर सप्लाई चेन का लचीलापन बढ़ाने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता में भी योगदान कर पाएंगे। समझौता हमारे बीच छात्रों, प्रोफेशनल और पर्यटकों का आदान-प्रदान आसान बनाएगा जिससे ये संबंध और मजबूत होंगे। दोनों देशों ने ऑस्ट्रेलिया-भारत इंफ्रास्ट्रक्चर फोरम की भी शुरुआत की है।
आज हम जो देख रहे हैं वो वास्तव में एक सच्ची व्यापक द्विपक्षीय विकास की कहानी है जो निरंतरता, प्रतिबद्धता और क्रियाशीलता से प्रेरित है। अगले 10 वर्षों में भारत दुनिया में सौर ऊर्जा की तकनीकों को अपनाने के मामले में सबसे बड़े देशों में से एक हो जाएगा और इस क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया और भारत के आविष्कारकों के लिए मिल-जुलकर काम करने की बहुत संभावना है। गतिशील वैश्विक भू-रणनीतिक और भू-आर्थिक स्थिति प्रतिस्पर्धा को तेज़ कर रहा है और भारत अपनी अर्थव्यवस्था में बेहतर प्रतिस्पर्द्धात्मकता पाने के लिए सुधार के पथ पर निरंतर है।
भारत-ऑस्ट्रेलिया महत्वपूर्ण खनिज निवेश भागीदारी के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया में व्यवहार्य लिथियम और कोबाल्ट परियोजनाओं के लिए निवेश करने का प्रस्ताव है, जो भारत की स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। उम्मीद की जा सकती है कि ये कदम भारत की ई-मोबिलिटी पहलों और अन्य विविध क्षेत्रों के लिए खनिज सुरक्षा के पूरक होंगे।
