बदायूं: एडीएम प्रशासन के स्टेनो व उनके भाई के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
अमृत विचार, बदायूं। एडीएम प्रशासन के स्टेनो सुविज्ञानंद और उनके भाई मंजुल के खिलाफ सिविल लाइन कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई है। उन पर मकान बेचने के नाम पर 60 लाख रुपये हड़पने का आरोप है। मकान का सौदा बदायूं में तैनात रह चुकीं अनवर जहां से हुआ था, जिनकी मौत हो चुकी है। …
अमृत विचार, बदायूं। एडीएम प्रशासन के स्टेनो सुविज्ञानंद और उनके भाई मंजुल के खिलाफ सिविल लाइन कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई है। उन पर मकान बेचने के नाम पर 60 लाख रुपये हड़पने का आरोप है। मकान का सौदा बदायूं में तैनात रह चुकीं अनवर जहां से हुआ था, जिनकी मौत हो चुकी है। अब रिपोर्ट उनकी रिश्तेदार महिला ने कराई है।
रिपोर्ट के मुताबिक कानपुर के मोहल्ला तलाक महल निवासी नौशाबा पत्नी रईस खान की मौसी अनवर जहां उनकी दूसरे रिश्ते में ननद भी लगती थीं। जिला फतेहपुर की तहसील बिंदकी के मोहल्ला मगुलाही निवासी अनवर जहां बाल विकास विभाग में सीडीपीओ थीं। शादी न होने की वजह से अनवर जहां अकेली ही रहती थीं। बदायूं में तैनाती के दौरान अनवर जहां की मुलाकात शहर के मोहल्ला आदर्श नगर गली नंबर 4 निवासी स्टेनो सुविज्ञानंद पुत्र मोती लाल से हुई।
सुविज्ञानंद एडीएम प्रशासन के स्टेनो हैं। अनवर जहां मकान खरीदना चाहती थीं। इसको लेकर उनकी सुविज्ञानंद से बातचीत हुई। सुविज्ञानंद और उनके भाई मजुल ने मिलकर बरेली की सनसिटी विस्तार कॉलोनी स्थित एक मकान का सौदा अनवर जहां को कराया। सौदा तय होने के समय अनवर जहां ने अग्रिम राशि के रूप में 30 लाख रुपये दिए थे। दोबारा में 30 लाख रुपये देकर रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराया था।
उसी दौरान एक दिन अचानक अनवर जहां के सीने में तेज दर्द उठा। घर में उन्हें अस्पताल ले जाने वाला कोई नहीं था तो नौकरानी ने जाकर सुविज्ञानंद से मदद मांगी। आरोप है कि सुविज्ञानंद व उनके भाई मंजुल दिल्ली ले जाने के बहाने अनवर जहां को अपने साथ ले गए। आरोप है कि उन दोनों ने रास्ते में अनवर जहां को मार दिया और परिजनों को फोन करके बीमारी से मौत होने की सूचना दी। यह घटना 23 अक्टूबर 2013 की है। अनवर जहां की अचानक मौत होने की वजह से मकान की रजिस्ट्री नहीं हो पाई थी।
मुकदमे की वादी नौशाबा के मुताबिक अनवर जहां की मौत के बाद उन्होंने सुविज्ञानंद से बात की। इस पर सुविज्ञानंद ने कहा कि वह मकान उसी को देंगे जो अनवर जहां का वारिस होगा, लेकिन दिया नहीं। सुविज्ञानंद और उनके भाई रुपये लेने के बाद भी मकान अपने कब्जे में रखे हैं। नौशाबा का आरोप है कि उन्हें धमकी दी जा रही है। उन्होंने कई आवाज उठाने की कोशिश की, लेकिन एडीएम का स्टेनो होने के नाते हर बार उनकी बात को दबा दिया गया। फोन करने पर वह कॉल रिसीव नहीं करते हैं।
तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी—विशाल प्रताप सिंह, एसएचओ सिविल लाइन।
