चीन को संदेश
चीन के साथ भारत का रिश्ता सामान्य नहीं है और जब तक सीमा पर स्थितियां सामान्य नहीं होतीं, रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते। गुरुवार को विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने इंडोनेशिया में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से हुई बातचीत में पूर्वी लद्दाख सीमावर्ती क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से दोनों देशों की सेनाओं …
चीन के साथ भारत का रिश्ता सामान्य नहीं है और जब तक सीमा पर स्थितियां सामान्य नहीं होतीं, रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते। गुरुवार को विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने इंडोनेशिया में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से हुई बातचीत में पूर्वी लद्दाख सीमावर्ती क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से दोनों देशों की सेनाओं को आमने-सामने से हटाने पर जोर दिया। इसे भारत की तरफ से चीन को सख्त और दो टूक संदेश के तौर पर देखा जा सकता है। क्योंकि सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति असामान्य होगी तो द्विपक्षीय संबंध सामान्य नहीं हो सकते।
सामान्य संबंधों की बहाली के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं अमन-बहाल होना जरूरी है। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर देपसांग, हॉट स्प्रिंग, गोगरा जैसे अग्रिम मोर्चों पर अभी जिस तरह से चीनी फौज जमी हुई है, वह भारत के लिए खतरा है। हालांकि इन मोर्चों पर भारत ने भी अपनी पकड़ काफी मजबूत कर ली है और चीन भी हकीकत को समझ रहा है। दरअसल दोनों देशों के बीच सीमा विवाद का कारण स्पष्ट सीमांकन का नहीं होना है।
भारत ने लगातार यह सुनिश्चित किया है कि दोनों देशों के बीच संबंधों के समग्र विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सद्भाव आवश्यक है। परंतु चीन की नीयत में खोट और धोखेबाजी की प्रवृत्ति भी विवादों और संघर्षों को जन्म देती रही है। हकीकत में देखें तो करीब चार हजार किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा का ज्यादातर हिस्सा दुर्गम इलाकों वाला है जहां किसी तरह से साफ तौर पर कोई सीमा रेखा तय कर पाना असंभव है। समझा जा सकता है कि भारत और चीन बड़ी और उभरती अर्थव्यवस्थाएं हैं। लिहाजा, दोनों के बीच मतभेद और समस्याएं होना असामान्य नहीं है।
पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़प के बाद अप्रैल 2020 में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच लद्दाख सीमा गतिरोध शुरू हुआ था। 15 जून, 2020 को दोनों देशों के सैनिकों के गलवान घाटी में भिड़ने के बाद गतिरोध बढ़ गया, जिसके परिणामस्वरूप 20 भारतीय सैनिक और अज्ञात संख्या में चीनी सैनिक मारे गए। सामान्य रिश्तों के लिए जरूरी है कि अप्रैल 2020 के पहले की स्थिति बहाल हो। पूर्वी लद्दाख गतिरोध के मुद्दे पर वरिष्ठ सैन्य कमांडर स्तर की 15 दौर की वार्ता हो चुकी है। जो बेनतीजा रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत और चीन के बीच सीमा पर घटनाएं तब तक होती रहेंगी, जब तक कि दोनों देशों के बीच सीमा समझौता नहीं हो जाता। विदेश मंत्री का यह कहना महत्वपूर्ण है कि भारत चीन संबंधों में तीन प्रकार की परस्परता-परस्पर सम्मान, परस्पर संवेदनशीलता एवं पारस्परिक हितों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।
