लखीमपुर-खीरी: नालों पर अतिक्रमण फिर डूबेगा का शहर
अमृत विचार, लखीमपुर-खीरी। शहर में तमाम ऐसी इमारतें हैं जो नाले पर बनी हैं। इससे नालों की साफ-सफाई नहीं हो पाती है। पानी का निकास न होने के कारण शहर में भारी जलभराव होता है। नगर पालिका ने हफ्ते भर पहले नालों पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए शहर में अभियान चलाया था। …
अमृत विचार, लखीमपुर-खीरी। शहर में तमाम ऐसी इमारतें हैं जो नाले पर बनी हैं। इससे नालों की साफ-सफाई नहीं हो पाती है। पानी का निकास न होने के कारण शहर में भारी जलभराव होता है। नगर पालिका ने हफ्ते भर पहले नालों पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए शहर में अभियान चलाया था। पालिका प्रशासन ने नालों पर बनी सीढ़ियां तोड़ दी थी और नालों पर किया गया अतिक्रमण हटाने के लिए दो दिन का समय मकान मालिकों और दुकानदारों को दिया था, लेकिन अभी तक नालों से अतिक्रमण नहीं हटा।
शहर में जल निकासी की समस्या बरसों पुरानी है। शहर में 52 छोटे और करीब दो हजार बड़े नाले हैं। इन छोटे-बड़े नालों पर लोगों ने नगर पालिका की अनदेखी और संलिप्तता के कारण अवैध तरीके से निर्माण करा लिया। नालों के ऊपर से सड़क तक सीढ़ियां बना ली। इससे नाला बंद हो गए। इस वजह से इन नालों की सफाई नहीं हो पा रही है। इससे हर साल बरसात में शहरवासियों को पानी का समुचित निकास न मिलने के कारण जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ता है।
नगर पालिका भी इन नालों की साफ-सफाई के नाम पर लाखों रुपये का खेल करती है। तड़ी झाड़ सफाई के नाम पर नालों और नालियों की आधी अधूरी सफाई कर कोरम पूरा कर लिया जाता है। इस साल भी बरसात के पहले नगर पालिका ने शहर के नालों की तड़ी झाड़ साफ-सफाई का दावा किया था, लेकिन हफ्ते भर पहले हुई आधे घंटे की झमाझम बारिश ने इन दावों की पोल खोलकर रख दी थी। पूरा शहर जलभराव की चपेट में आ गया था। हमदर्द चौराहा से लेकर हीरालाल धर्मशाला तक तमाम दुकानें और मकान नाला पर बने हैं।
मकान मालिकों ने चबूतरा बनाकर नाले को अंदर कर दिया और उस पर सीढ़ियां भी बना डालीं। इससे नाला की सफाई नहीं हो पा रही थी। पिछले दिनों एसडीएम श्रद्धा सिंह के नेतृत्व में नगर पालिका ने बुलडोजर लेकर नालों पर किए गए अतिक्रमण को ढहाने की कार्रवाई शुरू की गई थी। इस कार्रवाई के दौरान अतिक्रमणकारियों और नगर पालिका के कर्मचारियों का गठजोड़ भी उभरकर सामने आ गया था।
शहर के कचहरी रोड, हमदर्द दवाखाना से लेकर हीरालाल धर्मशाला तक जब प्रशासन का बुलडोजर लेकर नालों पर किया गया अतिक्रमण हटाने पहुंचा था तो उन पर किया गया अतिक्रमण ढहाने की बजाय सिर्फ बनाई गई सीढ़ियों को ढहा दिया गया और नाला पर किया गया अतिक्रमण हटाने के लिए दो दिन का अल्टीमेटम देकर कागजी कोरम पूरा कर लिया गया, लेकिन पांच दिन से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अभी तक नालों पर किया गया अतिक्रमण नहीं हट सका है। इससे इस बार भी शहर को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ेगा।
नाले पर बनी हैं नगरपालिका की तमाम दुकानें
सीओ सिटी दफ्तर के पास से लेकर हीरालाल धर्मशाला तक तहसील सदर से मिली दुकानें नगर पालिका की हैं। इन दिनों का निर्माण भी नाला के ऊपर किया गया है। इससे इस नाले की बरसों से साफ-सफाई नहीं हुई है। नगर पालिका ने इस नाले की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया।
ऐसा नहीं है कि उसे नाले पर दुकानों का निर्माण होने की जानकारी नहीं है, लेकिन इसके बाद भी नालों से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन और नगर पालिका ने कोई प्रयास नहीं किए। अब देखना यह है कि गरीबों के ठेले और खोमचे पर चलने वाला बुलडोजर क्या इन दुकानों, और इमारतों पर प्रशासन चला पाएगा।
पहली ही बरसात में खुली नाला सफाई की पोल
सौजन्या चौराहा से लेकर डॉन बॉस्को नहर तक सड़क के दोनों तरफ बड़ा नाला है। नगर पालिका प्रशासन ने इन दोनों नालों की ताड़ी झाड़ सफाई कराने का दावा किया था। साथ ही अभियान चलाकर नालों पर डाले गए सीमेंट के पत्थरों को बुलडोजर चलाकर ढहा दिया था। हफ्ते भर पहले हुई पहली ही बारिश ने वाले की साफ-सफाई की पोल खोल दी थी। नाला चोक होने के कारण इस मार्ग पर एक से डेढ़ फुट तक पानी बहने लगा था।
कुछ लोगों ने स्वयं अतिक्रमण नालों से हटा लिया है। जिन लोगों ने अभी अतिक्रमण नहीं हटाया है। जल्द ही अभियान चलाकर उसे हटाया जाएगा। इसमें आने वाले खर्च की वसूली अतिक्रमणकारी से की जाएगी—संजय कुमार, ईओ नगर पालिका लखीमपुर-खीरी।
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