बाराबंकी : जिला नहीं साहब को पसंद है राजधानी, HRA मिलने पर भी नहीं करते हैं रहने का कोई इंतजाम
बाराबंकी, अमृत विचार। लखनऊ के करीब होने के कारण यहां के अधिकारियों के पांव जिले में नहीं टिकते। जिले के अधिकांश अधिकारी शाम को काम खत्म होते ही लखनऊ प्रस्थान कर जाते हैं। इनमें अधिकांश वे अधिकारी हैं जिन्होंने सरकारी आवास एलाट नहीं करा रखा है। वह एचआरए भी लेते हैं और निजी आवास पर …
बाराबंकी, अमृत विचार। लखनऊ के करीब होने के कारण यहां के अधिकारियों के पांव जिले में नहीं टिकते। जिले के अधिकांश अधिकारी शाम को काम खत्म होते ही लखनऊ प्रस्थान कर जाते हैं। इनमें अधिकांश वे अधिकारी हैं जिन्होंने सरकारी आवास एलाट नहीं करा रखा है। वह एचआरए भी लेते हैं और निजी आवास पर रह भी रहे हैं।
बात जिला पंचायत से शुरू करते हैं यहां अधिकारियों और कर्मचारियों के आवास बने हुए हैं। इन आवासों में रहना न पड़े इसके लिए अधिकारियों ने आवासों को कंडम घोषित करवा दिया है। खुद अपर मुख्य अधिकारी जिला मुख्यालय पर निवास नहीं करते। अन्य अधिकारियों की हालत इससे अलग नहीं है। अवर अभियंता के आवास में एक लिपिक रह रहा है। अन्य कंडम घोषित किए गए आवासों में भी कोई न कोई रह रहा है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि एचआरए लेने के लिए अधिकारियों ने आवासों को कंडम घोषित कराया है।
जिला पंचायत के अलावा अन्य विभाग से अछूते नहीं है। कर्मचारियों को तो छोड़िए अधिकारी भी लखनऊ चले जाते हैं। ऐसा नहीं है कि जिले के आला अफसर इस स्थिति से वाकिफ न हों। बिजली, शिक्षा, सिंचाई सभी विभागों की ऐसी ही स्थिति है। यही कारण है कि शाम होते से पहले ही विकास भवन के अधिकांश अधिकारियों के चेंबर सुने हो जाते हैं। कुछ अधिकारी तो ऐसे हैं कि थोड़ी देर ठहरने के बाद ही जिला मुख्यालय छोड़ देते हैं। अधिकारी तभी शाम के समय जिला मुख्यालय पर मिल सकते हैं जब कोई महत्वपूर्ण बैठक होनी हो। इस संदर्भ में जिला अधिकारी से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका फोन नहीं उठा। जिला पंचायत अध्यक्ष ने भी व्यस्त होने का बहाना कर स्थिति को टाल दिया।
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