बरेली: अधिकारी गोद ले रहे मरीज, टीबी वार्ड में अव्यवस्थाओं का अंबार
बरेली, अमृत विचार। शासन की ओर से 2025 तक प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया है, जिसको लेकर सामाजिक संस्थाओं और अधिकारी व कर्मचारी टीबी रोगियों को गोद लेकर उन्हें उचित इलाज और पोषण मुहैया करा रहे हैं, लेकिन जिला अस्पताल के टीबी वार्ड में मरीजों को उचित इलाज मिल रहा है …
बरेली, अमृत विचार। शासन की ओर से 2025 तक प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया है, जिसको लेकर सामाजिक संस्थाओं और अधिकारी व कर्मचारी टीबी रोगियों को गोद लेकर उन्हें उचित इलाज और पोषण मुहैया करा रहे हैं, लेकिन जिला अस्पताल के टीबी वार्ड में मरीजों को उचित इलाज मिल रहा है और न ही सुविधाएं। यहां टीबी जैसे जानलेवा संक्रमण से ग्रसित मरीजों से बेरोकटोक तीमारदार मिल रहे हैं। वार्ड की सफाई व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं है। गंदगी के बीच मरीज भर्ती हैं। मामला अफसरों के संज्ञान में होने के बाद भी समस्या का निस्तारण नहीं किया जा रहा है।
जमीन पर अर्द्धनग्न अवस्था में लेटा मरीज, जिम्मेदार मौन
टीबी वार्ड परिसर में सेप्टिक वार्ड बना हुआ है, जिसमें घुसते ही दुर्गंध के चलते एक पल भी रुकना दुश्वार है। यहां सात मरीज भर्ती हैं, लेकिन एक मरीज कई दिनों से अर्द्धनग्न अवस्था में जमीन पर ही लेटा हुआ है, लेकिन कर्मी उसे बेड पर लिटाने की जहमत नहीं उठा रहे हैं।
एक बार ही डॉक्टर देखने आते हैं
टीबी वार्ड में 24 मरीज भर्ती हैं, वार्ड के बाहर मरीजों के तीमारदार डेरा डाले रहते हैं। तीमारदारों का कहना है कि दिन में एक बार सुबह ही डॉक्टर मरीज देखने आते हैं। टीबी के साथ ही अन्य कोई समस्या होने पर जब स्टाफ से कहा जाता है तो कोई भी डॉक्टर मरीजों को देखने नहीं आता है।
टीबी वार्ड में दिन में दो बार डॉक्टर को मरीज देखने के निर्देश दिए गए हैं, अगर ऐसा नहीं किया जा रहा है तो जवाब-तलब किया जाएगा। वहीं, सेप्टिक वार्ड प्रभारी को व्यवस्थाओं में सुधार करने को कहा जाएगा। मरीजों को समय पर इलाज मुहैया कराया जा रहा है—डॉ. मेघ सिंह, अपर निदेशक एवं प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल।
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