एसडीएम व्यापारी प्रकरण : एडीएम प्रशासन-जीएसटी के डीसी करेंगे मामले की जांच
मुरादाबाद,अमृत विचार। बिलारी के तत्कालीन उप जिलाधिकारी और फर्नीचर कारोबारी प्रकरण की विस्तृत जांच की कमेटी का गठन कर दिया गया। अब अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) सुरेंद्र सिंह और डिप्टी कमिश्नर जीएसटी गौरव चौहान मामले की जांच करेंगे। जिला अधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह ने दो सदस्यीय कमेटी को जांच के निर्देश दिए हैं। एडीएम प्रशासन के …
मुरादाबाद,अमृत विचार। बिलारी के तत्कालीन उप जिलाधिकारी और फर्नीचर कारोबारी प्रकरण की विस्तृत जांच की कमेटी का गठन कर दिया गया। अब अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) सुरेंद्र सिंह और डिप्टी कमिश्नर जीएसटी गौरव चौहान मामले की जांच करेंगे। जिला अधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह ने दो सदस्यीय कमेटी को जांच के निर्देश
दिए हैं।
एडीएम प्रशासन के आरंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम घनश्याम वर्मा को जिला मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। जबकि, राजबहादुर सिंह ने बिलारी के उप जिलाधिकारी का कार्यभार संभाल लिया है। उधर, मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह ने प्रकरण की आरंभिक रिपोर्ट शासन को भेज दी है। अब फर्नीचर कारोबारी द्वारा भुगतान के मुद्दे पर लगाए गए आरोप की छानबीन डिप्टी कमिश्नर जीएसटी ने शुरू कर दी है।
उप जिलाधिकारी द्वारा प्रस्तुत बिल और कारोबारी द्वारा की गई शिकायत के विविध पक्षों की जांच शुरू कर दी गई है। एसडीएम घनश्याम वर्मा की जेलर बेटी के भी बयान दर्ज होंगे। जबकि विभागीय चालक, कर्मचारी, बिल जारी करने वाले सदस्य को नोटिस जारी किया जाएगा। शिकायतकर्ता जाहिद हुसैन और एसडीएम घनश्याम वर्मा टीम के सामने पेश होंगे, जहां दोनों अपना अपना पक्ष रखेंगे। उसके बाद संयुक्त रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी।
कमेटी के सदस्य एडीएम (प्रशासन) सुरेंद्र सिंह ने बताया कि नई कमेटी ने जांच शुरू कर दी है। पहले दिन शिकायत पत्र के आधार पर छानबीन शुरू कर दी गई। आरंभिक जांच में बिलारी उपनगर के स्टेशन रोड स्थित तालाब पर 19.25 वर्ग मीटर भूमि पर अतिक्रमण प्रमाणित हुआ है।
इस मामले में खाते से भूमि निरस्त की जाएगी। जबकि कब्जाधारी फर्नीचर कारोबारी को अतिक्रमण हटाने के निर्देश दे दिए गए हैं। बताया कि आरोप और बिल के साक्ष्य की गहन छानबीन की जाएगी। उधर, प्रकरण जिला मुख्यालय से बिलारी तक चर्चाओं में है। सूत्र बताते हैं कि कर्मचारी और शिकायतकर्ता के बयान और साक्ष्य के आधार पर असल बात सामने आएगी। शिकायतकर्ता अपने स्टैंड पर कायम है और उप जिलाधिकारी ने फर्नीचर खरीद की जांच अधिकारी को बिल प्रस्तुत करके शिकायतकर्ता से खरीदारी के आरोप को खारिज करने का तर्क दिया है।
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