पीलीभीत: बचाव कार्य में नहीं ध्यान, प्रधानों की तय कर दी जिम्मेदारी

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, कलीनगर। प्रशासन ने संभावित बाढ़ को देखते हुए क्षेत्र के प्रधान और अन्य विभागों के अधिकारियों की जिम्मेदारी तो तय कर दी है लेकिन बाढ़ खंड की ओर से चल रहे बचाव कार्य को पूरा कराने में खास ध्यान नहीं है। ऐसे में बाढ़ से ग्रामीण तो घिरेंगे ही साथ ही जमीन भी …

अमृत विचार, कलीनगर। प्रशासन ने संभावित बाढ़ को देखते हुए क्षेत्र के प्रधान और अन्य विभागों के अधिकारियों की जिम्मेदारी तो तय कर दी है लेकिन बाढ़ खंड की ओर से चल रहे बचाव कार्य को पूरा कराने में खास ध्यान नहीं है। ऐसे में बाढ़ से ग्रामीण तो घिरेंगे ही साथ ही जमीन भी नदी में समाने की संभावना बढ़ गई है।

तहसील क्षेत्र के सीमांत गांवों में हर साल शारदा नदी की बाढ़ और कटान से लोग परेशान रहते हैं। ग्रामीणों के घर और जमीन को बचाने के लिए हर साल करोड़ों रुपए के बचाव कार्य भी कराए जाते हें। इस बार भी काम को शुरू किया गया लेकिन अभी तक पूरे नहीं हो सके हें। जो काम किए गए वह भी नदी की धार को मात नहीं दे पा रहे हैं। यही नहीं बचाव कार्य सुस्त गति से होने के कारण लोगों में चिंता बढ़ रही है।

इधर, बचाव कार्य में तेजी लाने और समय से पूरा कराने पर अधिकारियों का संबंधित विभाग पर जोर तो पूरा दिख रहा लेकिन अमल नहीं हो पा रहा है। अब संभावित बाढ़ को देखते हुए एसडीएम शिखा शुक्ला ने क्षेत्र के प्रधानों और अन्य अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक की।

बैठक में एसडीएम ने कहा कि बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों को जागरूक किया जाए। खानपान की वस्तुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। पशुओं के लिए भूसे और चारे की व्यवस्था करने के आदेश दिए। कहा कि बाढ़ से घिरे लोगों को सुरक्षित पहुंचाने के लिए मैजिकों की व्यवस्था अभी से कर ली जाए।

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