चिंता बढ़ाता चीन
हाल के दिनों में चीन की गतिविधियां इशारा करती हैं कि वह भारत के साथ लगने वाली पूरी नियंत्रण रेखा पर अपनी मोर्चेबंदी लगातार मज़बूत कर रहा है। वह भूटान के रास्ते भारत को घेरने की तैयारी कर रहा है। उसने मोचू नदी के पश्चिमी तट के साथ चलती अपने दावे वाली सीमा रेखा पर …
हाल के दिनों में चीन की गतिविधियां इशारा करती हैं कि वह भारत के साथ लगने वाली पूरी नियंत्रण रेखा पर अपनी मोर्चेबंदी लगातार मज़बूत कर रहा है। वह भूटान के रास्ते भारत को घेरने की तैयारी कर रहा है। उसने मोचू नदी के पश्चिमी तट के साथ चलती अपने दावे वाली सीमा रेखा पर मोर्चेबंदी मज़बूत करने के अलावा, मोचू नदी के तट पर न सिर्फ़ पूरा गांव बसा लिया, बल्कि एक सड़क भी बना डाली है।
इस निर्माण का देश पर असर पड़ना तय है, क्योंकि मोचू के आसपास निर्माण की वजह से चीनी आर्मी रणनीतिक तौर पर अहम डोकलाम पठार तक आसानी से पहुंच सकती है। इससे चीनी सेना भारत के संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर तक आसानी से पहुंच बना सकती है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर पूर्वोत्तर के राज्यों को बाकी देश से जोड़ता है। भूटान के मोर्चे पर यह घटना ऐसे समय हुई है, जब भारत और चीन के बीच लद्दाख में तनाव कम करने के लिए 16 दौर की बातचीत हो चुकी है। इसके बाद भी अहम नतीजा नहीं निकल पाया है। आखिरी दौर की बातचीत रविवार को हुई थी।
डोकलाम पठार 2017 में सुर्खियों में था, जब भारतीय सेना और चीन की पीएलए के बीच 70 दिनों से अधिक समय तक गतिरोध बना हुआ था। भारतीय सैनिकों की ओर से इलाके में तैनाती बढ़ाने और अपनी संप्रभुता के लिए डटे रहने के बाद चीनी सेना को क्षेत्र से पीछे हटना पड़ा था। जब भारत और चीन ने 28 अगस्त 2017 में डोकलाम में पीछे हटने पर सहमति जताई थी, तो ज्यादातर भारतीय विश्लेषकों ने इसे भारत की कूटनीतिक जीत बताया था।
चीन द्वारा मोचू नदी को इकतरफा तरीके से सीमा बनाना और पूरे डोकलाम क्षेत्र पर क़ब्ज़ा करना, 1890 में चीन और अंग्रेज़ों के बीच हुए उस समझौते के खिलाफ है, जिसका हवाला 2017 के डोकलाम विवाद के दौरान खुद चीन ने दिया था। आज वह मोचू नदी के तट तक आ पहुंचा है। ये तो 1998 में ख़ुद चीन द्वारा दिए गए उस वचन के खिलाफ है, जिसमें उसने कहा था कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के निपटारे तक, दोनों देशों के बीच मार्च 1959 के पहले वाली स्थिति को ही बनाए रखा जाएगा।
गुरुवार को विदेश मंत्रालय ने डोकलाम के आसपास चीन के गांव बसाने की खबरों पर कहा है कि भारत अपनी सुरक्षा को चुनौती पेश करने वाले सभी घटनाक्रमों पर नजर रखे हुए है। वास्तव में चीन की हरकतें उसके विस्तारवादी रवैये का नतीजा है। उसकी मंशा को देखते हुए भारत अपनी तैयारी मजबूत कर रहा है। तैयारियों को लेकर भारत को कोई कमी नहीं रखनी चाहिए।
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