लखनऊ: पीएम आवास योजना के नाम पर आ रहा है फोन, तो न करें निजी जानकारी साझा
लखनऊ । प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ठगी करने वालों पर सरकार भले ही नकेल कसने की बात करती हो,लेकिन इसके बाद भी ठगी करने वाले अपनी करतूतों से बाज नहीं आ रहे हैं, यह आये दिन ठगी करने के नये-नये तरीके ढूढ़ते हैं । प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर धोखाधड़ी की कोशिशे आज …
लखनऊ । प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ठगी करने वालों पर सरकार भले ही नकेल कसने की बात करती हो,लेकिन इसके बाद भी ठगी करने वाले अपनी करतूतों से बाज नहीं आ रहे हैं, यह आये दिन ठगी करने के नये-नये तरीके ढूढ़ते हैं । प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर धोखाधड़ी की कोशिशे आज भी जारी हैं, पहले फोन कर लोगों को विश्वास मुं लिया जाता है,फिर उनकी निजी जानकारी व पैसे भेजने की बात करते हैँ,इतना ही नहीं विकास भवन में आकर संपर्क करने की बात करते हैं,लेकिन जब पीड़ित विकास भवन पहुंचता है तो उसे असलियत का पता चलता है।
आज भी ऐसे कई लोग राजधानी में हैं जो प्रधानमंत्री आवास योजना का नाम लेकर लोगों को बरगलाने का काम कर रहे हैं,इसके लिए बकायद फोन कर लोगों को मकान मिलने की खुशखबरी सुनाई जाती है,उसके बाद शुरू होता है भोले भाले लोगों को ठगने का सिलसिला,फोन करने वाला शख्स आपसे आपकी निजी जानकारियां भी साझा करने को कहता है। इस तरह के फोन कॉल से सावधान रहने की जरूरत है।
इन्दिरा नगर क्षेत्र का बताया जा रहा हैं
ताजा मामला इन्दिरा नगर क्षेत्र का बताया जा रहा हैं,जहां गौरव कुमार के फोन पर 7081873416 मोबाइल नंबर से एक फोन आता है,फोन करने वाला करने वाला शख्स खुद को पीएम आवास योजना का अधिकारी बताते हुये बैंक डिटेल देने की बात कहता है,ज्यादा जानकारी के लिए विकास भवन बुलाता है।
दरअसल, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहते मिलने वाले आवास के लिए कई साल पहले राजधानी के कई परिवारों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। ज्यादातर इन्हीं परिवारों को पास मैसेज व फोन काल आते हैं। फोन करने वाला शख्स खुद को केंद्रीय अधिकारी बताता है और साथ ही आवास की पहली किश्त देने की बात करता है। इसके लिए वह लोगों को निजी जानकारियां फोन पर भेजने को कहता है,यदि कोई व्यक्ति फोन करने वाले शख्स से ज्यादा जानकारी लेता है,तो वह उसे विकास भवन में आकर संपर्क करने को कहता है,लेकिन जब लोग विकास भवन पहुंचते हैं ,तब उन्हें सारी असलियत पता चलती है।
जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक राजेश कुमार त्रिपाठी बताते हैँ कि हमारे यहां से इसका कोई लेना देना नहीं है,वह बताते हैं कि हमारे यहां लाभार्थी से जो भी जानकारी मांगी जाती है खण्ड विकास स्तर पर व सचिव के माध्यम से मांगी जाती हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि फोन या अन्य किसी माध्यम से हमारे यहां सूचना नहीं मागी जाती है। उन्होंने बताया कि कुछ प्रकरण उनके भी संज्ञान में आये हैं,लेकिन वह सारे प्रकरण नगरीय क्षेत्र के थे। उन्होंने बताया कि किसी के फोन करने पर अपनी कोई जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
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