लखनऊ : सरोजनी नगर वार्ड से लापता हुआ ‘विकास’, बजबजाती है नालियां, महीनों घर में कैद रहते हैं बच्चे

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का एक इलाका है सरोजनी नगर वार्ड। बताया जाता है कि साल 2006 में यह वार्ड दो भागों में बंट गया। जिसके बाद एक वार्ड बना सरोजनी नगर द्वितीय। इस वार्ड से विकास आजतक लापता है। जिसकी वजह से बच्चों का घर से निकलना दूभर है। हम यहां किसी …

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का एक इलाका है सरोजनी नगर वार्ड। बताया जाता है कि साल 2006 में यह वार्ड दो भागों में बंट गया। जिसके बाद एक वार्ड बना सरोजनी नगर द्वितीय। इस वार्ड से विकास आजतक लापता है। जिसकी वजह से बच्चों का घर से निकलना दूभर है। हम यहां किसी शख्स विकास की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि इस क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं पानी,बिजली व सड़क की बात कर रहे हैं।

यहां के कुछ इलाके तो ऐसे हैं जहां न चलने के लिए ठीक सड़क हैं और न ही बिजली की उचित व्यवस्था,पीने के पानी के लिए भी सरकारी तौर पर कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं की गयी है। सबसे बुरी स्थित सड़कों की हैं, बारिश के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं, अभी बारिश नहीं हुई है,तब भी सड़कें नालों की तरह दिखाई देती हैं। यदि बारिश हो जाये तो बच्चे 15-15 दिन स्कूल नहीं जा पाते।

सरोजनी नगर वार्ड दो राजधानी का वह इलाका जो अमौसी स्थित अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां की मौजूदा स्थित काफी खराब है,लोग नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं, घरों से पानी तक नहीं निकल पा रहा है। यहां न तो सड़कें हैं और नालियां भी नहीं हैं। ऐसे में यहां के लोग पहले घर के सामने गड्डे में पानी भरते हैं,उसके बाद गंदा पानी निकालने के लिए मोटर लगाते हैं।

अब दिक्कत आती है कि गंदा पानी जाये कहां जाये, तो वह आसपास के खाली प्लाटों में इक्कठा होता है। यही वजह की यहां की सड़कें भी नाले का रूप ले चुकी हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि घर से निकलते ही पानी में ही निकलना पड़ता है। लेकिन सरकार व प्रशासन को इतनी फुरसत कहां जो यहां रहने वाले इंसानों की दिक्कत को समझे।

70 हजार के लगभग आबादी

सरोजनी नगर वार्ड दो में करीब 32 हजार वोटर हैं, वहीं कुल आबादी 70 हजार के लगभग बतायी जाती है। इस वार्ड के प्रमुख इलाकों की बात करें तो आंशिक अनोरा, नादर गंज, राम नगर कालोनी, समा विहार, अवध विहार, रुस्तम विहार, दयाल पूरी, बदाली खेड़ा, मकदूम नगर,पीएसी 32 बटालियन, विष्णु लोक, शक्ति पुरम,मानस नगर,गोकुल नगर,नारायण पूरी,अली नगर सुनहरा आदि इलाके आते हैं।

लेकिन सबसे बुरी स्थिति चूड़ी वाली गली यानी की अवध बिहार व रूस्तम नगर की है। यहां सड़कों पर जल भराव के कारण लोग घर से निकल तक नहीं पाते हैं। इतना ही नहीं बच्चे स्कूल तक नहीं जा पाते हैं,कोई बीमार हो जाये तो इलाके में एंबुलेस भी नहीं आ सकती,लोग किसी तरह चारपाई पर मरीज को लेकर जाते हैं।

मुश्किलें तब और बढ़ जाती है जब किसी की मौत हो जाती है, शव को ले जाने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। बिजली के लिए खंभे नहीं है,लोगों ने लकड़ी के डंडों पर बिजली का तार लगा रखा है जो बड़े खतरे को दावत देता नजर आता है। आरोप है कि बिजली के खंभे के लिए विभाग के लोग पैसे की मांग करते हैं। इस इलाके में गंदगी इतनी की लोगों का जीना मुहाल है।

इस इलाके की पार्षद संतोष कुमारी है,उनके प्रतिनिधि किशन यादव बताते हैं कि यहां नई आबादी है,प्लाटिंग करने वालों ने प्लाट काट कर बेंच दिया,सड़क बनाई नहीं। हमलोग जो सड़कें बनवाते हैं,वह भारी वाहनों से टूट जाती है। उन्होंने बताया कि सीवर पड़ने के बाद पानी निकासी की व्यवस्था दुरूस्त होगी। सरकार यदि मदद करे तो सीवर पड़ जाये और लोगों को जल भराव जैसी मुश्किलों से निजात मिल सके।

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