मुरादाबाद: एक दशक में डेढ़ गुना बढ़ी निगम की आबादी
मुरादाबाद, अमृत विचार। एक दशक में नगर निगम क्षेत्र में आबादी डेढ़ गुना बढ़ गई है। लेकिन इस अनुरूप निगम में मानव संसाधन न बढ़ने से व्यवस्था बनाने में अड़चन आ रही है। सफाई व्यवस्था की माॅनीटरिंग करने के लिए पर्याप्त संख्या में सफाई निरीक्षक ही नहीं हैं। 2011 की जनगणना में आठ लाख थी …
मुरादाबाद, अमृत विचार। एक दशक में नगर निगम क्षेत्र में आबादी डेढ़ गुना बढ़ गई है। लेकिन इस अनुरूप निगम में मानव संसाधन न बढ़ने से व्यवस्था बनाने में अड़चन आ रही है। सफाई व्यवस्था की माॅनीटरिंग करने के लिए पर्याप्त संख्या में सफाई निरीक्षक ही नहीं हैं।
- 2011 की जनगणना में आठ लाख थी शहर की जनसंख्या, अब 12 लाख से अधिक
- 01 सफाई निरीक्षक के हिस्से में 30,000 घरों की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी
70 वार्डों में बंटे नगर निगम क्षेत्र में जनसंख्या के अनुपात में सुविधाएं न बढ़ने से व्यवस्था का रोना रोया जा रहा है। सबसे अधिक मारामारी सफाई व्यवस्था की लचर स्थिति और घर-घर कूड़ा उठान की है। इसमें निगम प्रशासन बाहर की कंपनियों को लाकर काम सौंपता है, लेकिन वह केवल रुपये वसूलने में ही व्यस्त रहती हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार शहर की आबादी आठ लाख थी। लेकिन अब यह बढ़कर 12 लाख से अधिक हो गई है। इसके अनुरूप न तो सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ पाई और न सफाई निरीक्षकों के पद। एक सफाई निरीक्षक के हिस्से में 30,000 घरों की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी है। जिसे खुद नगर आयुक्त ने भी अपर्याप्त माना।
दस हजार की आबादी पर 28 सफाई कर्मचारी
वार्डों में सफाई कर्मचारियों की कम संख्या पर अधिकारी हमेशा कटघरे में खड़े होते हैं। लेकिन उनकी लाचारी यह है कि जितनी संख्या सफाई कर्मचारियों की है उसी के अनुरुप तैनाती करना भी मजबूरी है। अपर नगर आयुक्त अनिल कुमार सिंह का कहना है कि दस हजार की आबादी पर 28 सफाई कर्मचारी तैनात किए जा रहे हैं। पार्षद शिवराज सिंह ने अपने वार्ड में 17 हजार की आबादी पर 32 सफाई कर्मचारी को अपर्याप्त बताया तो अपर नगर आयुक्त ने उन्हें आबादी के अनुरुप तैनाती का गणित बताया।
जीआईएस सैटेलाइट सर्वे में बढ़ा हाउसहोल्ड
शहर में भवनों के जीआईएस सैटेलाइट सर्वे में अब संख्या काफी बढ़ गई है। पहले निगम क्षेत्र में 1.32 लाख मकान थे जो अब जियोग्राफिकल सर्वे में 1.71 लाख बिल्डिंग फुटप्रिंट हैं।
2011 की जनगणना के अनुसार आबादी आठ लाख थी। जो अब बढ़कर 12 लाख से अधिक हो गई है। इसके अनुरूप कर्मचारियों व अधिकारियों की संख्या नहीं बढ़ी है। जिससे व्यवस्था की मानीटरिंग में दिक्कत हो रही है। एक सफाई निरीक्षक के जिम्मे 30,000 हजार घरों की मानीटरिंग है। -संजय चौहान, नगर आयुक्त
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