बाराबंकी: सड़क से लेकर खेत खलिहान तक आवारा पशुओं का आतंक, वाहन चालकों का छल्का दर्द
बाराबंकी। दरियाबाद क्षेत्र में छुट्टा पशुओं का आतंक इस कदर व्याप्त है कि किसानों को धान की फसल बचाने को लेकर कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है । बाड़ तार रस्सी के साथ-साथ किसान फसल बचाने को लेकर खेत में मचान बनाकर फसलों की रखवाली करने को मजबूर है । सरकारी गौ आश्रय स्थल होने …
बाराबंकी। दरियाबाद क्षेत्र में छुट्टा पशुओं का आतंक इस कदर व्याप्त है कि किसानों को धान की फसल बचाने को लेकर कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है । बाड़ तार रस्सी के साथ-साथ किसान फसल बचाने को लेकर खेत में मचान बनाकर फसलों की रखवाली करने को मजबूर है । सरकारी गौ आश्रय स्थल होने के बावजूद जिम्मेदारों की लापरवाही से अन्नदाता परेशान है
दरियाबाद क्षेत्र में धान फसल रोपाई अंतिम दौर में है ।
गौवंशीय पशु लोगों को घायल कर रहे
किसान एक तरफ जहां बारिश न होने से परेशान है वही दूसरी तरफ छुट्टा जानवर भी किसानों के लिए मुसीबत बने सरकार के तमाम कोशिशों के बाद भी गौ आश्रय स्थल से अधिक पशु खेतों में किसानों की फसल चट कर रहे है । सड़कों पर बैठे गौवंशीय पशु लोगों को घायल कर रहे है । किसानों को फसल को छुट्टा पशुओं से बचाना किसानों के लिए अब मुश्किल हो रहा है। क्षेत्र के किसान फसलों की सुरक्षा अब बाड़ के सहारे करने का प्रयास करने के साथ साथ मचान से फसलों की रात दिन निगरानी कर रहे है । लेकिन छुट्टा पशुओं का झुंड बाड़ के साथ फसल को भी बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्र के किसान तेजी से बढ़ रहे छुट्टा पशुओं से फसल बचाने के लिए तरह-तरह की तरकीब लगा रहे हैं। किन्तु सब बेकार साबित हो रही है। किसानों के लिये रात दिन फसल बचाने की चुनौती है । वही सकरकारी गौ आश्रय स्थल की हालत भी दयनीय है ।
फसलें बच नहीं पा रही हैं
क्षेत्र के सैकड़ो किसानों का कहना है कि अब फसलों की सुरक्षा राम भरोसे है। फसलों की सुरक्षा के उपाय फेल हैं। खेती करना अब इनके कारण भारी पड़ रहा है। किसान कहते हैं कि खेतों में बाड़ और मचान बनाने के बावजूद भी फसलें बच नहीं पा रही हैं। रात दिन फसलों की निगरानी करनी पड़ रही है किन्तु मौका पाते ही दर्जनों की संख्या में झुंड बना कर चल रहे छुट्टा पशु फसल को बर्बाद कर दे रहे हैं। किसानों की समस्याओं को कोई नहीं सुनने वाला है।
किसानों के आय का प्रमुख श्रोत यही फसल है। पहले नीलगाय, सूअर जैसे जंगली जानवर ही फसल नुकसान करते थे अब छुट्टा पशुओं का आतंक सपनों पर पानी फेर रहा है। सरकार द्वारा बनवाये गये गौ आश्रय स्थल भी वेमतलब साबित हो रहे है । जिनको गौ आश्रय स्थल में छुट्टा जानवरो को भेजने की जिम्मेदारी दी गयी वह भी अपनी जिम्मेदारी को निभाने से कतराते है ।
पशुचिकित्सा अधिकारी दरियाबाद अशोक वर्मा ने बताया कि पशुओं को पकड़ कर गौ आश्रय स्थल पहुचाने व गौआश्रय स्थल की साफ सफाई आदि की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान की है ।
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