लखनऊ: महेंद्र हत्याकांड में पुलिस का खुलासा, एकतरफा प्यार में ममेरे ससुर ने करवाई थी हत्या

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लखनऊ। ठाकुरगंज कोतवाली क्षेत्र में गत दिनों हुई जीआरएम लॉन के मालिक रौशल लाल मौर्या के बेटे कपड़ा व्यवसायी महेंद्र मौर्या (28) के हत्याकांड का पुलिस ने रविवार को खुलासा कर दिया। दरअसल, महेंद्र की पत्नी से एकतरफा प्यार के चक्कर में उसके ममेरे ससुर संजय मौर्या ने ही दोस्तों और पेशेवर अपराधियों के साथ …

लखनऊ। ठाकुरगंज कोतवाली क्षेत्र में गत दिनों हुई जीआरएम लॉन के मालिक रौशल लाल मौर्या के बेटे कपड़ा व्यवसायी महेंद्र मौर्या (28) के हत्याकांड का पुलिस ने रविवार को खुलासा कर दिया। दरअसल, महेंद्र की पत्नी से एकतरफा प्यार के चक्कर में उसके ममेरे ससुर संजय मौर्या ने ही दोस्तों और पेशेवर अपराधियों के साथ मिलकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया था।

पुलिस ने मामले में संजय के दोस्त मलिहाबाद निवासी संजय गौतम और काकोरी निवासी मुकेश रावत को आईआईएम रोड पर घैलापुल बंधा मोड़ के पास से गिरफ्तार कर लिया है। जबकि सआदतगंज निवासी संजय मौर्या समेत चार अन्य अभियुक्तों पारा निवासी ज्ञान सिंह यादव उर्फ ज्ञानी, पारा निवासी दिनेश सिंह ठाकुर और दुबग्गा निवासी शनि कश्यप उर्फ कुलदीप कश्यप की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। यह जानकारी डीसीपी पश्चिम शिवासिम्पी चन्नप्पा ने ठाकुरगंज कोतवाली में प्रेसवार्ता के दौरान दीं।

भांजी के प्यार में पागल था संजय

डीसीपी एस चन्नप्पा ने बताया कि पूछताछ में पता चला है कि मुख्य अभियुक्त संजय मौर्या महेंद्र की पत्नी से पूर्व से ही एकतरफा प्रेम करता था और शादी करना चाहता था। पर रिश्ते में भांजी होने के कारण पारिवारिक विरोध के डर से वह इस बात को सबके सामने नहीं रख सका। इसी बीच पांच माह पूर्व परिजनों ने भांजी की शादी महेंद्र मौर्या से कर दी। शादी के बाद भी आए दिन संजय, महेंद्र की पत्नी को कॉल करता रहता था। महेंद्र को शक हुआ तो उसने कुछ दिन पूर्व संजय को चेतावनी देते हुए पत्नी से दूर रहने को कहा। इसके बाद से ही संजय ने महेंद्र की हत्या की साजिश रची थी।

पेशेवर अपराधी को जमानत पर जेल से निकलवाया

आरोपी सतीश गौतम ने बताया कि संजय ने उससे महेंद्र की हत्या की साजिश की जानकारी दी थी। संजय ने सतीश और मुकेश को महेंद्र की रेकी करने को कहा। वारदात के लिए बाराबंकी जेल में बंद पेशेवर अपराधी ज्ञान सिंह यादव को जमानत पर छुड़वाया। दिनेश सिंह ठाकुर को भी साजिश में शामिल कर उसके आईडी प्रूफ पर एक सिम ले लिया, ताकि पुलिस को गुमराह कर सकें।
दुकान से ही कर रहे थे रेकी

घटना के दिन सतीश और मुकेश महेंद्र की दुकान से ही रेकी कर रहे थे। रात में जैसे ही महेंद्र दुकान बंद कर घर के लिए निकला। सतीश ने फोन कर इसकी सूचना संजय को दे दी। दुकान से महज 500 मीटर की दूरी पर भूहर रेलवे अंडरपास के समीप रास्ता खराब होने के कारण जैसे ही महेंद्र ने अपनी कार की गति धीमी की, संजय और ज्ञान सिंह यादव ने बाइक सामने लगाकर उसे रोक लिया और दोनों ओर से अंधाधुंध फायरिंग करते हुए मौत के घाट उतार दिया।

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