अल्पसंख्यक संस्थाओं के अधिकारी कोर्ट आदेश के प्रति गम्भीर नहीं: हाईकोर्ट

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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार/निरीक्षक उप्र मदरसा बोर्ड लखनऊ को 10 अगस्त को जवाबी हलफनामा के साथ तलब किया है। कहा है कि समय समय पर कोर्ट अल्पसंख्यक संस्थाओं के लिए आदेश देती रहती है। अधिकारी उसे गंभीरता से नहीं लेते। जिसके कारण अल्पसंख्यक संस्थाओं के अध्यापकों के अवमानना केस भारी संख्या में विचाराधीन है। …

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार/निरीक्षक उप्र मदरसा बोर्ड लखनऊ को 10 अगस्त को जवाबी हलफनामा के साथ तलब किया है। कहा है कि समय समय पर कोर्ट अल्पसंख्यक संस्थाओं के लिए आदेश देती रहती है। अधिकारी उसे गंभीरता से नहीं लेते। जिसके कारण अल्पसंख्यक संस्थाओं के अध्यापकों के अवमानना केस भारी संख्या में विचाराधीन है।

कोर्ट ने पूछा है कि विभाग में कोर्ट आदेश के अनुपालन की मानिटरिंग कैसे की जाती है। विभाग पर कुल कितने अवमानना मामले लंबित हैं, जिनमें आदेश का पालन किया गया है और कितने में अनुपालन नहीं किया गया है। कोर्ट आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने वाले अधिकारियों पर क्या ऐक्शन लिया गया है।

कोर्ट ने निरीक्षक मदरसा शिक्षा बोर्ड को जवाब के साथ हाजिर होने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने साबिर खान व अन्य की अवमानना याचिका पर दिया है। कोर्ट ने 19 जुलाई 13 को अल्पसंख्यक संस्थान के अध्यापकों के वेतन भुगतान का निर्देश दिया था, किंतु पालन नहीं किया गया।जिसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह आदेश दिया है।

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