कानपुर : सरकारी दवा खरीद के टेंडर डाल सकेंगे लघु उद्यमी, उप मुख्यमंत्री ने बैठक में दिया आश्वासन

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कानपुर, अमृत विचार। लघु दवा निर्माता सरकारी अस्पतालों को अब दवा की आपूर्ति कर सकेंगे। सरकारी दवा खरीद के लिए उप्र मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन द्वारा मांगे जाने वाले टेंडर में अभी वे प्रतिभाग नहीं कर पाते। इसकी बड़ी वजह है टेंडर की कठोर शर्तें। कारपोरेशन ने पांच से 20 करोड़ रुपये सालाना वार्षिक टर्नओवर वाली …

कानपुर, अमृत विचार। लघु दवा निर्माता सरकारी अस्पतालों को अब दवा की आपूर्ति कर सकेंगे। सरकारी दवा खरीद के लिए उप्र मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन द्वारा मांगे जाने वाले टेंडर में अभी वे प्रतिभाग नहीं कर पाते। इसकी बड़ी वजह है टेंडर की कठोर शर्तें। कारपोरेशन ने पांच से 20 करोड़ रुपये सालाना वार्षिक टर्नओवर वाली कंपनियों को ही इसके लिए योग्य माना है। इस शर्त को खत्म् कराने के लिए फार्मास्यूटिकल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के पदाधिकारर 20 साल से संघर्ष कर रहे थे।

उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक के साथ लखनऊ में हुई बैठक में उनकी मांग मान ली गई। उप मुख्यमंत्री ने कहा कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लघु उद्यमी भी टेंडर डाल सकें।

महामंत्री अतुल सेठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन के अधिकारियों ने बड़े दवा निर्माताओं से मिलकर लघु दवा उद्यमियों को टेंडर में प्रतिभाग करने से रोकने के लिए बड़ा खेल किया है। जानबूझकर पांच करोड़ से 20 करोड़ रुपये के वार्षिक टर्नओवर की शर्त लगा दी गई। उन्हें पता है कि लघु उद्यमी टेंडर में भाग लेंगे तो प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और दवाएं सस्ती मिलेंगी। अभी तो बड़ी कंपनियां चार से पांच गुना अधिक दर पर दवाएं देती हैं। सस्ती दवाएं मिलेंगी तो वर्तमान बजट में ही चार से पांच गुना अधिक मरीजों को दवाएं वितरित की जा सकेंगी।

महामंत्री ने कहा कि अधिकरियों का तर्क होता है कि बड़ी इकाइयों से गुणवत्ता युक्त दवाएं मिलती हैं। दवाओं की गुणवत्ता का टर्नओवर से कोई सम्बन्ध नहीं है। टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए वही उत्पादक योग्य होते हैं जिनके पास औषधि नियंत्रक विभाग परफॉर्मेंस , कैपिसिटी और नॉन कनविक्शन का प्रमाण पत्र जारी करता है।

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