लखनऊ: डायबिटीज रेटिनोपैथी का बेहतर व सस्ता इलाज केजीएमयू में, 20 हजार का इंजेक्शन महज दो हजार में

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

लखनऊ। डायबिटीज, आंखों को भी काफी नुकसान पहुंचाता है। इससे पीड़ित व्यक्ति डायबिटिक रेटिनोपैथी का शिकार हो सकता है,यह बीमारी मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति की रेटिना यानी की आंख के पर्दे को नुकसान पहुंचाती है। बताया जा रहा है यह बीमारी दुनिया भर में आखों की रोशनी जाने का एक बड़ा कारण हैं। केजीएमयू में …

लखनऊ। डायबिटीज, आंखों को भी काफी नुकसान पहुंचाता है। इससे पीड़ित व्यक्ति डायबिटिक रेटिनोपैथी का शिकार हो सकता है,यह बीमारी मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति की रेटिना यानी की आंख के पर्दे को नुकसान पहुंचाती है। बताया जा रहा है यह बीमारी दुनिया भर में आखों की रोशनी जाने का एक बड़ा कारण हैं। केजीएमयू में इस बीमारी का गुणवत्तपूर्ण व सस्ता इलाज किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि इस बीमारी में इलाज के लिए चिकित्सक एक इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं,जिसकी बाहर कीमत करीब 20 हजार रूपये हैं,वहीं केजीएमयू में वह इंजेक्शन महज दो हजार की कीमत का पड़ रहा है। केजीएमयू के नेत्र रोग विभाग के प्रो.संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि इस बीमारी में सबसे बड़ी समस्या यह है कि जब यह बीमारी बढ़ जाती है, तो इसके इलाज के विकल्प भी कम हो जाते हैं।

उन्होंने बताया कि डायबिटिक रेटिनोपैथी बीमारी होने पर आंखों के पर्दे पर सूजन आ जाती है। सबसे पहले पीड़ित व्यक्ति को धुंधला दिखाई पड़ना शुरू होता है। लेकिन स्थिति तब ज्यादा खराब होती है जब आंख के पर्दे से खून का श्राव होने लगता है। तब पीड़ित व्यक्ति को काले-काले धब्बे दिखाई पड़ने लगते हैं।

यदि यही रक्त श्राव अधिक हो जाये तो फिर आंखों से दिखाई देना बंद हो जाता है। यदि इस समस्या का समय पर इलाज न कराया जाये, तो बाद में चलकर कोई इलाज कारगर साबित नहीं होता। ऐसे में समय रहते चिकित्सक से मिलकर डायबिटीज को नियंत्रित रखें साथ ही समय-समय पर नेत्र रोग विशेषज्ञ से सलाह लेते रहें।

बताया जा रहा है कि यह रेटिना को रक्त पहुंचाने वाली बेहद ही पतली नसों के क्षतिग्रस्त होने के कारण होता है। इस बीमारी का समय पर इलाज जरूरी है। इलाज में लापरवाही से पूर्ण अंधापन भी हो सकता है। डायबिटीज के करीब 50 फीसदी मरीज इस बीमारी से पीड़ित हैं। विश्व भर में अंधेपन का यह सबसे बड़ा कारण है।

प्रो.संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि डायबिटीज में आंखों के पर्दे का इलाज तभी कारगर साबित होता है,जब डायबिटीज नियंत्रित रहती है। उन्होंने बताया कि नशे से बचें,साथ ही वजन नियंत्रित करने के साथ ही स्वस्थ भोजन लेते रहना चाहिए।

इसके अलावा उन्होंने बताया कि पर्दे की सूजन कम करने के लिए एक दवा का इस्तेमाल किया जाता है,जो इंजेक्शन के जरिये दिया जाता है। इस इंजेक्शन का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि पर्दे की सूजन ठीक हो जाती है और रोशनी वापस आ जाती है। इस इंजेक्शन का असर करीब 6 हप्ते तक रहता है। इस बीमारी में एक से अधिक बार इंजेक्शन लगाने की जरूरत पड़ सकती है।

उन्होंने बताया कि इस इंजेक्शन में जिस दवा का इस्तेमाल किया,उसकी कीमत बाजार में करीब 20 हजार रूपये के करीब है,जबकि केजीएमयू में मरीजों को यह इंजेक्शन महज 2 हजार रूपये में लगाया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि कई बार इस बीमारी में लेजर व सर्जरी की जरूरत पड़ जाती है।

यह भी पढ़ें:-डायबिटीज रेटिनोपैथी के मरीजों को अब महेज 5 मिनट में मिलेगा केजीएमयू में इलाज, जानें कैसे?

संबंधित समाचार