बिहार: RJD और JDU की जोड़ी बनाने में प्रशांत किशोर का क्या रोल? मिला यह जवाब
पटना। बिहार में आज नीतीश कुमार सीएम पद की शपथ लेने जा रहे हैं और महागठबंधन के सहयोग से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बन रहे हैं। इसको लेकर रणनीतिकार प्रशांत किशोर का कहना है कि इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। नीतीश कुमार के पालाबदल पर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अहम टिप्पणी की है। उन्होंने …
पटना। बिहार में आज नीतीश कुमार सीएम पद की शपथ लेने जा रहे हैं और महागठबंधन के सहयोग से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बन रहे हैं। इसको लेकर रणनीतिकार प्रशांत किशोर का कहना है कि इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। नीतीश कुमार के पालाबदल पर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने 10 सालों में यह छठा प्रयोग किया जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति पर भी असर होगा।
किसी भी गठबंधन में नीतीश कुमार के ही सीएम बने रहने को उनकी विश्वसनीयता कहे जाने पर भी प्रशांत किशोर ने जवाब दिया। कहा कि यह संभावनाओं की बात है और ऐसा नहीं है कि उनका नुकसान नहीं हुआ है। 115 विधायकों वाली पार्टी अब 43 पर सिमट गई है। यह अलग बात है कि वह किसी तरह से गठजोड़ में सीएम बन जाते हैं।
प्रशांत किशोर ने मीडिया से बातचीत में बिहार के सियासी हालातों को लेकर कहा कि 2012-13 से ही राज्य में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बना हुआ है और 10 सालों में यह छठी सरकार है। नीतीश के 2017 में एनडीए में जाना क्या गलती थी। इस सवाल पर पीके ने कहा कि यह तो समय ही बताएगा। छठी सरकार है, जब नीतीश कुमार सीएम बन रहे हैं। दुखद बात यह है कि इन बदलावों के चलते भी सीएम नीतीश ही रहे हैं और काम करने के तरीके में भी कोई बदलाव नहीं आया है।
चुनावी रणनीतिकार ने कहा कि यह देखने वाली बात होगी कि शराबबंदी पर क्या फैसला होगा। आरजेडी तो इसका विरोध करती रही है। तेजस्वी यादव 10 लाख नौकरियों के वादे को कैसे इसे पूरा करते हैं। यदि पूरा कर दें तो युवाओं का भला होगा। नीतीश कुमार की छवि पर असर के सवाल पर पीके ने कहा कि उनकी कोई ग्रोथ नहीं दिख रही है और जनता उनके चेहरे पर वोट नहीं कर रही है। वह यदि पालाबदल कर आए हैं तो निश्चित तौर पर चुनाव में भी उन पर असर दिखेगा।
2010 में उनका जो स्ट्राइक रेट था, वह लगातार कम हो रहा है। नीतीश के पीएम बनने की संभावनाओं को लेकल उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ऐसे व्यक्ति नहीं हैं। कहा कि नीतीश कुमार के पालाबदल की वजह यह है कि वह असहज महसूस कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘नीतीश जब से भाजपा के साथ गए थे, तब से वह असहज थे। पीके ने कहा कि 2015 और अब के महागठबंधन में फर्क है। मुझे नहीं लगता है कि वह कोई राष्ट्रीय रणनीति बनाकर काम कर रहे हैं, जिसका केंद्र बिहार हो।
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