जनमाष्टमी कब और कैसे मनाएं…पढ़ें

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हल्द्वानी, अमृत विचार। रक्षाबंधन के बाद एक बार फिर जनमाष्टमी कब मनाए इस बात को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। ज्योतिषाचार्य डा.मंजू जोशी, पंडित कैलाश पांडे और मनोज जोशी इस शंका का समाधान कर रहे हैं और यह भी बता रहे हैं कि पूजा अर्चना किस प्रकार करें और पूजा का शुभ मुहूर्त …

हल्द्वानी, अमृत विचार। रक्षाबंधन के बाद एक बार फिर जनमाष्टमी कब मनाए इस बात को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। ज्योतिषाचार्य डा.मंजू जोशी, पंडित कैलाश पांडे और मनोज जोशी इस शंका का समाधान कर रहे हैं और यह भी बता रहे हैं कि पूजा अर्चना किस प्रकार करें और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है। तो आइए बताते हैं आपको किस दिन जनमाष्टमी मनाएं।

हर वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन श्री कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस दिन बाल गोपाल की पूजा करने से सुख व शांति का फल मिलता है।
इस बार दो शुभ योग में जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा सकता है।

अष्टमी तिथि में होती है जन्माष्टमी
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी की पूजा अष्टमी तिथि में करने का विधान है। पंचांग के अनुसार 18 अगस्त 2022 रात्रि 09:21 अष्टमी तिथि से शुरू होगी। इसी दिन ध्रुव और वृद्धि योग भी बन रहा है। अष्टमी तिथि का समापन 19 अगस्त 2022 रात्रि 10:50 पर होगा। ऐसे में कुछ लोग 18 अगस्त को ही जन्माष्टमी का व्रत रखेंगे और पूजा करेंगे।

अभिजीत मुहूर्त- 18 अगस्त को 12:05 से लेकर दोपहर 12:56 तक
वृद्धि योग- 17 अगस्त को शाम 08:56 से लेकर 18 अगस्त को शाम 08:41 तक
धुव्र योग- 18 अगस्त को शाम 08:41 से लेकर 19 अगस्त को शाम 08:59 मिनट

इस बार 18 और 19 अगस्त दोनों ही दिन शुभ योग बन रहे हैं, जिसमें पूजा करा शुभ और फलदायी होगा। जन्माष्टमी पर ध्रुव और वृद्धि योग का निर्माण हो रहा है। 18 अगस्त सुबह 08:41 तक वृद्धि योग रहेगा और इसके बाद 19 अगस्त रात्रि 08:58 तक ध्रुव योग रहेगा।

ऐसे करें कान्हा का श्रृंगार
जन्माष्टमी के दिन कान्हा जी का विशेष श्रृंगार किया जाता है। उन्हें रंग-बिरंगे सुंदर वस्त्र पहनाये जाते हैं। इस दिन पगड़ी या मुकुट, बांसुरी, कड़े और बाजूबंध, मोरपंख, कुंडल और कमरबंध, पाजेब, काजल जैसी चीजों से उनका श्रृंगार किया जाता है।

ऐसे लगाएं भोग
भगवान श्री कृष्ण को धनिया पंजीरी का प्रसाद लगाया जाता है। उन्हें ये बहुत ही प्रिय हैं, इसलिए जन्माष्टमी के पावन पर्व पर धनिया पंजीरी का भोग भगवान श्री कृष्ण को जरूर लगाएं। पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान श्री कृष्ण को धनिया अति प्रिय है। जिस वजह से आज जन्माष्टमी के दिन धनिया पंजीरी का प्रसाद चढ़ाया जाता है। धनिया पंजीरी का प्रसाद का भोग लगाने से भगवान श्री कृष्ण की विशेष कृपा बनी रहती है।

जन्माष्टमी के दिन इन चीजों को घर लाने से होगी बरकत और बने रहेगी कृपा
मोरपंख
बांसुरी
माखन
वैजयंती माला
गाय-बछड़ा

जन्माष्टमी पूजन विधि
जन्माष्टमी पर सुबह उठकर स्नान आदि करें और पूरे दिन व्रत रखें। भगवान श्रीकृष्ण को गंगाजल और दूध से स्नान कराएं और नए वस्त्र पहनाकर मोर मुकुट, बांसुरी, वैजयंती माला, कुंडली, तुलसी दल, कुंडल आदि से उनका श्रृंगार करें। भगवान श्रीकृष्ण के झूले को भी फूल मालाओं से सजाएं। पूजा में श्रीकृष्ण को फल, फूल, मखाने, मक्खन, मिश्री का भोग, मिठाई, मेवे आदि चढ़ाएं और धूप-दीप जलाएं। इसके बाद पुन: रात 12 के बाद श्रीकृष्ण की पूजा करें उन्हें झूला झुलाएं और आरती करें। इसके बाद सभी में प्रसाद बाटें।

जन्माष्टमी 2022 विशेष मुहूर्त और राहुकाल
अभिजीत मुहूर्त- 12:05 -12:56 तक
वृद्धि योग- बुधवार 17 अगस्त दोपहर 08:56 – गुरुवार 18 अगस्त रात्रि 08:41 तक
राहुकाल- गुरुवार 18 अगस्त दोपहर 02:06 -03:42 तक

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2022 तिथि व शुभ मुहूर्त
जन्माष्टमी तिथि- 18 अगस्त 2022, गुरुवार
अष्टमी तिथि आरंभ- गुरुवार 18 अगस्त रात्रि 09: 21 से
अष्टमी तिथि समाप्त- शुक्रवार 19 अगस्त रात्रि 10:59 तक

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