लखनऊ : विद्युत उत्पादन निगम में दो कंपनियों का विलय, कैबिनेट बैठक में मिली मंजूरी
लखनऊ, अमृत विचार। राज्य सरकार ने राज्य विद्युत उत्पादन निगम में दो बिजली कंपनियों उत्तर प्रदेश जल विद्युत उत्पादन निगम व जवाहरपुर विद्युत उत्पादन निगम के विलय का फैसला लिया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इससे जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। तीनों निगमों के विलय के …
लखनऊ, अमृत विचार। राज्य सरकार ने राज्य विद्युत उत्पादन निगम में दो बिजली कंपनियों उत्तर प्रदेश जल विद्युत उत्पादन निगम व जवाहरपुर विद्युत उत्पादन निगम के विलय का फैसला लिया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इससे जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
तीनों निगमों के विलय के प्रस्ताव के अनुमोदन के साथ ही, विलय योजना उत्तर प्रदेश विद्युत सुधार (राज्य उत्पादन कम्पनियों का समामेलन एवं विलय) योजना-2021 को भी मंजूरी दी गई है। इस योजना के क्रियान्वयन के सम्बन्ध में अनुषांगिक कार्रवाई के लिए राज्य विद्युत उत्पादन निगम के प्रबंध निदेशक को अधिकृत करने का भी निर्णय लिया गया है।
प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले इन कंपनियों के विलय का प्रस्ताव सरकार के पास भेजा गया गया था। फैसले के तहत अब प्रदेश में बिजली उत्पादन की केवल एक कंपनी ही रहेगी। राज्य विद्युत उत्पादन निगम तापीय बिजलीघरों के साथ ही जल विद्युत बिजलीघरों का संचालन करेगा। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद प्रदेश में बहुत कम जल विद्युत इकाइयां बची थीं।
जवाहरपुर विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की स्थापना ताप विद्युत परियोजना की स्थापना के लिए 4 सितम्बर 2009 में की गई थी। कालान्तर में इस परियोजना की स्थापना सार्वजनिक क्षेत्र में किए जाने के लिए ऊर्जा विभाग ने इसे राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के हवाले कर दिया था। 16 जून 2015 से यह कंपनी राज्य विद्युत उत्पादन निगम की सहायक कम्पनी के रूप में कार्य कर रही है। वर्तमान में निगम की कुल प्रदत्त अंश पूंजी 1596.05 करोड़ रुपये है। कंपनियों के विलय से विद्युत उत्पादन क्षमता 6,134 मेगावट से बढ़कर 7,979 मेगावाट हो जाएगी।
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