गंभीर लापरवाही
चीन से आए कोरोना रेपिड किट से जांच पर दो दिनों की रोक के बाद देश में जांच की रणनीति को झटका लगा है। कोशिश यह थी कि ज्यादा से ज्यादा लोगों के रेपिड टेस्ट किए जाएं। मगर फिलहाल इस पर रोक के बाद संक्रमण रोकने के लिए सबसे जरूरी उपाय जांच पर सवालिया निशान …
चीन से आए कोरोना रेपिड किट से जांच पर दो दिनों की रोक के बाद देश में जांच की रणनीति को झटका लगा है। कोशिश यह थी कि ज्यादा से ज्यादा लोगों के रेपिड टेस्ट किए जाएं। मगर फिलहाल इस पर रोक के बाद संक्रमण रोकने के लिए सबसे जरूरी उपाय जांच पर सवालिया निशान भी खड़े हो गए हैं। एक तरफ देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है तो दूसरी ओर जांच में लगातार तेजी भी जरूरी है। मगर अब सरकार को इस बारे में फिर से विचार करना होगा कि जांच का दायरा कैसे बढ़ाया जाए।
देश में संक्रमण के आंकड़े बढ़ने का यह हाल है कि 30 मार्च को कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 12 हजार थी जो 22 दिनों में बढ़कर 20 हजार का आंकड़ा छूने को है। पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 1383 नए मामले सामने आए हैं, वहीं 50 लोगों की मौत हो गई है। देश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 19,984 हो गई है। कोविड-19 महामारी से मौत का आंकड़ा 640 पहुंच गया है। कोरोना वायरस के कुल 19,984 मामलों में से 15474 एक्टिव केस हैं।
कोरोना के इस तरह से बढ़ते आंकड़ों के बीच रेपिड टेस्ट की शुरुआत हुई तो लगा था कि अब ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच होगी जिससे संक्रमण पर काबू पाने में अहम मदद मिलेगी। मगर अब रेपिड टेस्ट नहीं हो सकेंगे। हालांकि इस बारे में भारत स्थित चीनी दूतावास ने बयान देते हुए कहा है कि रेपिड टेस्ट की गुणवत्ता सही न होना गंभीर विषय है। मगर सवाल यह है कि इस बारे में खाली बयान देने भर से चीन अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता है।
इससे पहले चीन की ओर से तमाम देशों को निर्यात किए गए मास्क, पीपीई किट की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ खड़े हुए हैं। चीन को इस महामारी से बचाव के लिए एक जिम्मेदार देश की तरह बर्ताव करना चाहिए। वह भी तब जब खुद चीन इस संक्रमण को फैलाने के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। चीन के पास इस वक्त कोरोना संक्रमण से बचाव संबंधित तमाम चिकित्सा सामग्री बहुतायत में है, मगर अन्य देशों को यह ध्यान रखना होगा कि चीन से ऐसा सामान मंगाए जाने से पहले उसके सेंपल जांच की व्यवस्था हो ताकि गुणवत्ता का पता लगाया जा सके।
किसी भी स्वास्थ्य जांच में गुणवत्ता 95 प्रतिशत तक सही होने पर जांच को मानकानुसार माना जाता है, मगर चीन के भेजे रैपिड की गुणवत्ता का प्रतिशत मात्र 5 निकला जो कि बहुत चिंतनीय है। लिहाजा इन किट से आगे भी रैपिड जांच कराने, न कराने पर विचार किया जाना चाहिए।
