बरेली: बिगड़ रही दिनचर्या, बढ़ रहे सिजेरियन प्रसव, तीन साल में बढ़ा ग्राफ
बरेली, अमृत विचार। एक महिला के लिए मां बनने से बड़ा सुख कोई और नहीं होता। परिवार भी इन अहम दिनों में उनके खानपान से लेकर पूरा ध्यान रखता है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही इशारा कर रहे हैं। बीते तीन वर्षों में जिला महिला अस्पताल में सामान्य तुलना में सिजेरियन प्रसव की संख्या में …
बरेली, अमृत विचार। एक महिला के लिए मां बनने से बड़ा सुख कोई और नहीं होता। परिवार भी इन अहम दिनों में उनके खानपान से लेकर पूरा ध्यान रखता है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही इशारा कर रहे हैं। बीते तीन वर्षों में जिला महिला अस्पताल में सामान्य तुलना में सिजेरियन प्रसव की संख्या में वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार गर्भवतियों की अनियमित दिनचर्या और समाज में फैली कुछ भ्रांतियां इसका मुख्य कारण है। जिससे सिजेरियन प्रसवों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है।
तीन साल में ऐसे बढ़ा ग्राफ
वर्ष 2019 – 2020 – 2021
सामान्य प्रसव 3199 – 3174 – 3065
सिजेरियन प्रसव 973 – 1015 – 1204
संतुलित आहार से होता है बच्चे का विकास
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डा. मृदुला शर्मा के अनुसार गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को संतुलित आहार लेना आवश्यक है। पोषक तत्वों की कमी के चलते बच्चों के शारीरिक विकास पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। दूध, छाछ, पनीर, दही आदि का सेवन अधिक करना चाहिए। वहीं, गर्भावस्था के सात माह तक सुबह शाम वॉक करना भी सेहत के लिए बहुत जरूरी है।
सामान्य प्रसव से बच्चे में संक्रमण का खतरा कम
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डा. प्रगति अग्रवाल ने बताया कि सामान्य प्रसव कम क्षति पहुंचाने वाली और प्रकृति द्वारा नियोजित प्रक्रिया है, मगर मरीज अब कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं, जिस कारण मरीज तुरंत सिजेरियन करने को कहते हैं। अधिकांश मामलों में ऐसा देखा गया है। सामान्य प्रसव होने से बच्चों में अन्य बीमारियों का खतरा कम होता है। अधिकांश मामले देहात के अस्पतालों से गंभीर अवस्था में रेफर होकर आते हैं, इसलिए रिस्क को देखते हुए सिजेरियन करना पड़ता है।
यह भ्रांतियां भी बन रहीं सिजेरियन का कारण
विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश महिलाओं को यह लगता है कि सामान्य प्रसव के बाद मोटापा बढ़ जाएगा या फिर उनके सौंदर्य पर विपरीत असर पड़ेगा। यह महज भ्रांतियां हैं। सामान्य प्रसव के बाद उचित देखभाल के बाद शरीर पूर्व की तरह ही रहता है। जरूरत है कि दिनचर्या का संयमित होना।
सामान्य प्रसव के साथ ही सिजेरियन की संख्या बढ़ी है। हालांकि, अधिकांश मामले सीएचसी-पीएचसी से गंभीर रेफर मरीजों के हैं। वहीं, कुछ मरीज पहले ही डॉक्टर को दर्द न सहन कर पाने की बात कहकर सिजेरियन को बोल देते हैं—डा. अलका शर्मा, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल।
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