मुरादाबाद : योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य की जंग में भूपेंद्र बन गए ‘चौधरी’
आशुतोष मिश्र, अमृत विचार । भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर भूपेंद्र सिंह चौधरी की ताजपोशी दो बड़ों के बीच ‘जंग’ में जीत है। इस साल विधानसभा चुनाव के बाद से ही अध्यक्ष पद पर नई ताजपोशी की चर्चाएं शुरू थीं। भाजपा के चित्रकूट के अधिवेशन में इस बात को मंच मिल गया। संगठन और सत्ता …
आशुतोष मिश्र, अमृत विचार । भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर भूपेंद्र सिंह चौधरी की ताजपोशी दो बड़ों के बीच ‘जंग’ में जीत है। इस साल विधानसभा चुनाव के बाद से ही अध्यक्ष पद पर नई ताजपोशी की चर्चाएं शुरू थीं। भाजपा के चित्रकूट के अधिवेशन में इस बात को मंच मिल गया। संगठन और सत्ता में संतुलन को गंभीरता से समझने वाले भूपेंद्र सिंह चौधरी की पार्टी में अपनी साख है। तीन दशक से अधिक की इसकी राजनीतिक यात्रा इस बात की गवाह है। संकेत इस बात के पुख्ता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बीच जंग में भूपेंद्र सिंह संगठन के ‘चौधरी’ बन गए।
राजनीतिक समीक्षकों की मानें तो पार्टी ने एक तीर से कई निशाने साधने के लिए यह प्रयोग किया है। पार्टी सूत्र कहते हैं कि प्रदेश में दूसरी बार योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में सरकार बनने के बाद से शीर्ष नेतृत्व अगले प्रदेश अध्यक्ष की खोज में जुटा था। क्योंकि निवर्तमान अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह को मंत्री पद का दूसरी बार उपहार मिल गया। चूंकि दल में एक आदमी को दो जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती है, इसलिए यह तय था कि स्वतंत्रदेव कुछ दिन के ही प्रदेश अध्यक्ष हैं।
उधर, वर्ष 2017 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने में केशव प्रसाद मौर्य की मेहनत भी किसी से छिपी नहीं रही। लेकिन, मुख्यमंत्री के लिए योगी आदित्यनाथ के नाम पर मुहर लग गयी थी। योगी और केशव के रिश्ते मीडिया में कई बार सुर्खी बन चुके हैं। विधानसभा चुनाव के ऐन वक्त पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद के घर जाने को राजनीतिक चश्मे से देखा गया। लेकिन, विधानसभा चुनाव में दोनों की बीच का मनमुटाव भी छुपाया नहीं जा सका।
चुनावी सभाओं में केशव के संबोधन में इस मतभिन्नता का झलक मिलती रही। यह दीगर बात है कि योगी पार्ट-टू में केशव प्रसाद मौर्य का रुतबा कम नहीं हुआ। लेकिन, पारंपरिक सिराथू सीट से उनकी हार ने कई ‘तराने’ छेड़ दिए। राजनीतिक समीक्षक मानते हैं कि कुशल संगठक, ओबीसी मतों पर अपनी धाक रखने वाले केशव प्रसाद मौर्य और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भीतर मनमुटाव थमा नहीं है। सूत्र कहते हैं कि तीन महीने से प्रदेश अध्यक्ष की बागडोर को लेकर नेतृत्व में मंथन जारी था। भूपेंद्र सिंह चौधरी की मुख्यमंत्री से नजदीकी जग जाहिर है और लंबे समय से संगठन का कार्य देखने वाले भूपेंद्र पूर्व प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य की पसंद माने जाते हैं। जिसके लाभ स्वरूप भूपेंद्र सिंह के सिर ‘ताज’ सजा गया।
समीक्षक केशव प्रसाद मौर्य के सरकार से बड़ा संगठन के ट्वीट पर भी बाल की खाल निकाल रहे हैं। माना जा रहा है कि केशव का वह बयान इस कहानी की पटकथा लिखने का मजबूत आधार बना है। पार्टी सूत्रों की मानें तो भूपेंद्र सिंह चौधरी की इन्हीं समानता ने इनकी राय आसान कर दी। पार्टी का एक धड़ा केशव प्रसाद मौर्य को संगठन की बागडोर दोबारा सौंपने के मूड में था, जबकि मुख्यमंत्री इस बात से सोलह आना सहमत नहीं थे। इसी अंतर्विरोध ने योगी- मौर्य की सामान पसंद वाले भूपेंद्र को यह जिम्मेदारी मिल गई। जानकार कहते हैं कि वर्ष 2024 भूपेंद्र के लिए स्वयं को साबित करने का समय होगा। विधानसभा चुनाव में जाटलैंड में अपनी पकड़ प्रमाणित करने वाले भूपेंद्र पश्चिमी यूपी में सपा-रालोद को कैसे पटखनी देंगे, यह इनके प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।
अध्यक्ष बनने पर स्वामी रुपेंद्र प्रकाश ने जताई खुशी
मुरादाबाद। पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र चौधरी को भाजपा उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष बनाए जाने पर प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम हरिद्वार के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी रुपेंद्र प्रकाश महाराज ने खुशी जताई है। उन्होने प्रदेश अध्यक्ष बनने पर कहा कि भूपेंद्र चौधरी सौम्य, सरल, मृदुभाषी और उनके प्रिय हैं। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में भाजपा और मजबूत होगी, इसका विश्वास है। वह जीवन में निरंतर प्रगति करेंगे इसकी मंगलकामना है। भूपेंद्र ने सार्वजनिक जीवन में जनसेवा की शपथ ली है। यह उनके जीवन की सार्थकता है।
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