बरेली: दुकानों पर रद्दी हो गए लाखों निमंत्रण कार्ड
बरेली, महिपाल गंगवार। कोरोना वायरस की संक्रमण शादी कार्ड के कारोबार की भी कमर तोड़कर रख दी है। अचानक शादियां टलने से करीब तीन लाख छपे हुए कार्ड दुकानों और प्रिटिंग प्रेस प्रेसों में पड़े हैं। इनको कोई पूछने तक नहीं आ रहा। हालांकि अब शादियों के लिए छूट देकर समारोह में शामिल होने वालों …
बरेली, महिपाल गंगवार। कोरोना वायरस की संक्रमण शादी कार्ड के कारोबार की भी कमर तोड़कर रख दी है। अचानक शादियां टलने से करीब तीन लाख छपे हुए कार्ड दुकानों और प्रिटिंग प्रेस प्रेसों में पड़े हैं। इनको कोई पूछने तक नहीं आ रहा।
हालांकि अब शादियों के लिए छूट देकर समारोह में शामिल होने वालों की संख्या 30 तक सीमित कर दी गई है। दरअसल, मार्च महीने के अंतिम सप्ताह से शािदयों की शुरुआत होनी थी। अप्रैल, मई और जून तक अनवरत रूप से शादियों शुभ मुहूर्त थे। मार्च, अप्रैल, मई और जून में होने वाली शादियों के लिए का कार्ड भी छपवाए जाने लगे थे। लोगों ने पसंद करने के बाद कार्ड छपने के लिए दुकानों व प्रिटिंग प्रेसों में छोड़ दिए थे। करीब 25 फीसदी रकम भी एडवांस दे दी थी।
समय और शािदयां अिधक होने की वजह से धड़ाधड़ कार्ड छपाई का काम शुरू हो गया था। छपे हुए कार्ड ग्राहकों तक पहुंच पाते, इससे पहले लाकडाउन की घोषणा हुई। इस दौरान होने वाली शादियां भी टाल दी गई। ऐसे में अब जब दुकानें खुलीं तो लोगों ने कार्ड वापस लेना तक जरूरी नहीं समझा। कारोबारियों के अनुसार करीब तीन लाख कार्ड रद्दी हो गए हैं। इन्हें कोई उठाने नहीं आ रहा।
कोरोना वायरस ने शादी कार्ड के कारोबार की कमर तोड़ दी है। अब महज 30 लोग ही शादी में शामिल हो सकते हैं। इतने कम लोगों को बुलाने के लोग कार्ड छपवाने से रहे। आगे भी कोई खास उम्मीद नहीं है।
-अशोक भटनागर, अकांक्षा कार्डस
छोटे व्यापरियों को जो माल दिया उसका भुगतान फंसा है, जिन्होंने आर्डर देकर कार्ड मंगवाए उन्होंने कार्ड लेने से इंकार कर दिया। ऐसे में लाखों के प्रिंट हुए कार्ड डंप पड़े हुए हैं। दुकानें खुलने के बाद भी कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। -राजीव अग्रवाल, दुर्गा कार्डस
