भीमा कोरेगांव हिंसा: एनआईए की याचिका पर नवलखा को नोटिस
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में दिल्ली और मुंबई की विशेष अदालतों की न्यायिक कार्यवाही से संबंधित दस्तावेज तलब करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की याचिका पर मंगलवार को मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा से जवाब तलब किया। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की …
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में दिल्ली और मुंबई की विशेष अदालतों की न्यायिक कार्यवाही से संबंधित दस्तावेज तलब करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की याचिका पर मंगलवार को मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा से जवाब तलब किया।
न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय खंडपीठ ने एनआईए की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद नवलखा को नोटिस जारी किया। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद की तारीख मुकर्रर की। खंडपीठ में न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी भी शामिल हैं।
सुनवाई की शुरुआत में मेहता ने दलील दी कि उच्च न्यायालय ने अपने अधिकार क्षेत्र के बगैर ही निचली अदालत को रिकॉर्ड पेश करने का 27 मई को आदेश दिया था। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि नवलखा की अंतरिम जमानत की याचिका लंबित होने के दौरान ही उन्हें मुंबई ले जाने को लेकर एनआईए ने अनावश्यक जल्दबाजी की।
नवलखा उन पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में शामिल हैं, जिन्हें नक्सलियों के साथ कथित संबंधों और भीमा कोरेगांव हिंसा में उनकी कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। नवलखा को अगस्त 2018 में पुणे पुलिस ने उनके दिल्ली आवास से गिरफ्तार किया था।
