दुनिया के इन Videos में देखिए कैसे ध्वस्त होती हैं बहुमंजिला इमारतें

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Edited By Amrit Vichar
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नोएडा। नोएडा (उत्तर प्रदेश) में सुपरटेक के 318-फीट और 338-फीट ऊंचाई वाले ट्विन टावर को 9 साल की कानूनी लड़ाई के बाद रविवार को ढहा दिया गया। 32 व 29 मंज़िला ट्विन टावर को धमाका कर ढहाने के लिए करीब 3,700 किलोग्राम विस्फोटक इस्तेमाल किया गया। दोनों टावर के निर्माण में अग्नि सुरक्षा नियमों समेत …

नोएडा। नोएडा (उत्तर प्रदेश) में सुपरटेक के 318-फीट और 338-फीट ऊंचाई वाले ट्विन टावर को 9 साल की कानूनी लड़ाई के बाद रविवार को ढहा दिया गया। 32 व 29 मंज़िला ट्विन टावर को धमाका कर ढहाने के लिए करीब 3,700 किलोग्राम विस्फोटक इस्तेमाल किया गया। दोनों टावर के निर्माण में अग्नि सुरक्षा नियमों समेत कई मानदंडों का उल्लंघन मिला था।

ट्विन टावर से पहले भी दुनिया में इससे बड़े और ऊंचे टावर गिराए जा चुके हैं। इस वीडियो में मीना प्लाजा, एएफई टावर सहित इतिहास की कई ऊंची इमारतों को जमींदोज होते देखा जा सकता है।

अबु धाबी के मीना प्लाजा को 2022 में बारूद के विस्फोट में उड़ाया गया था। अधूरा बनाने की वजह से मीना प्लाजा को ध्वस्त कर दिया गया था। जर्मनी के एफी टावर AfE Tower को साल 2014 में गिरा दिया गया था। इसकी ऊंचाई 116 मीटर थी। यह 38 मंजिला बिल्डिंग थी. इस 2 फरवरी 2014 को गिराया गया था।

ऊंची-ऊंची इमारतों को गिराने के लिए हर मंजिल पर विस्फोटक लगाए जाते हैं। टावर को मजबूती देने वाले खंभों पर बारूद लगाकर इमारतों को कुछ ही सेकेंड में ध्वस्त कर दिया जाता है। दुनिया में ऐसी कई बहुमंजिला इमारतें जमींदोज की जा चुकी हैं।

बता दें कि ट्विन टावर भारत में विस्फोटक के जरिए ध्वस्त होने वाली सबसे ऊंची इमारत है। ट्विन टावर को गिराने वाले ब्लास्टर चेतन दत्ता के मुताबिक, इस डिमोलिशन में किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा।

नोएडा में सुपरटेक ट्विन टावर को ढहाने में ‘वॉटरफॉल इम्प्लोशन’ तकनीक इस्तेमाल हुई जिसके तहत ढांचा अंदर की ओर और अपने ऊपर गिरा जिसने एक वॉटरफॉल का इफेक्ट को दर्शाया। यह इम्प्लोशन गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का इस्तेमाल करता है और इसमें विस्फोटक और डेटोनेटर्स की ज़रूरत पड़ती है। यह तरीका लागत, समय और सुरक्षा के आधार पर इस्तेमाल होता है।

सुपरटेक ने नोएडा के ट्विन टावर के 915 में से करीब 600 फ्लैट बेचकर लगभग ₹180 करोड़ जुटाए थे और दोनों टावर करीब ₹70 करोड़ की लागत से बनाए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक को फ्लैट खरीदारों को 12% की दर से ब्याज के साथ रिफंड देने और कोर्ट की रजिस्ट्री में ₹1 करोड़ जमा कराने को कहा था।

सुपरटेक ने नोएडा में अपने ट्विन टावर को ढहाए जाने पर एक बयान जारी कर कहा है, “हम शीर्ष न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हैं और इसे लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” सुपरटेक ने दावा किया कि टावर्स को 2009 में नोएडा अथॉरिटी ने स्वीकृति दी थी और बिल्डिंग के प्लान में कोई बदलाव नहीं किया गया था।

नोएडा में सुपरटेक के ट्विन टावर को ढहाए जाने के बाद अनुमानित 80,000 टन मलबा निकलेगा। नोएडा अथॉरिटी के जनरल मैनेजर (योजना) इश्तियाक अहमद ने बताया है कि 21,000 क्यूबिक मीटर मलबे को एक खाली ज़मीन पर डंप किया जाएगा और बाकी बचे मलबे को टावरों के बेसमेंट सेक्शन में बनाए गए गड्ढे में ही छोड़ दिया जाएगा।

नोएडा (उत्तर प्रदेश) में सुपरटेक के ट्विन टावर को ढहाने की लागत ₹20 करोड़ आंकी गई है। इन दोनों इमारतों को बनाने में करीब ₹70 करोड़ लगे थे। सुपरटेक इसे ढहाने के लिए करीब ₹5 करोड़ का भुगतान कर रहा है जबकि बाकी ₹15 करोड़ की रकम इसके लगभग 80,000 टन के मलबे को बेचकर प्राप्त की जाएगी।

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देखिए कुछ ही सेकेंड में जमींदोज होती अलग-अलग इमारतों के वीडियो….

 

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