कानपुर के पॉश एरिया के लोग पेट में पाल रहे ‘बम’, जांच में डब्ल्यूएचओ के मानक से कहीं ज्यादा मिला यूरेनियम का स्तर
कानपुर। चकेरी, चौबेपुर, दहेली सुजानपुर, गांधीग्राम, घाटमपुर ही नहीं शहर के पॉश एरिया के लोग भी पेट की बीमारियों का ‘बम’ पाल रहे हैं। यहां के भूमिगत जल में यूरेनियम खतरनाक स्तर पर मिला है। आईआईटी के विशेषज्ञों के शोध और जांच में इसकी पुष्टि हुई है। यूरेनियम की मानक से अधिक मात्रा सिर्फ पेट …
कानपुर। चकेरी, चौबेपुर, दहेली सुजानपुर, गांधीग्राम, घाटमपुर ही नहीं शहर के पॉश एरिया के लोग भी पेट की बीमारियों का ‘बम’ पाल रहे हैं। यहां के भूमिगत जल में यूरेनियम खतरनाक स्तर पर मिला है। आईआईटी के विशेषज्ञों के शोध और जांच में इसकी पुष्टि हुई है। यूरेनियम की मानक से अधिक मात्रा सिर्फ पेट को ही नहीं, बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों को नकुसान पहुंचा सकती है। यह इलाके काकादेव, नवीन नगर, अफीम कोठी, कल्याणपुर के हैं।
आईआईटी के अर्थ साइंस विभाग के विशेषज्ञों ने कानपुर और कानपुर देहात के सरकारी हैंडपंप के पानी की जांच कराई, जिसमें कई हैवी मैटल्स मिले, लेकिन यूरेनियम की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानक से काफी ज्यादा पाई गई। मानक 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर है।
इससे अधिक होने पर यूरेनियम युक्त पानी शरीर के अंगों प्रभावित कर सकता है। इस रिपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय जर्नल एप्लाइड साइंस में प्रकाशित किया गया। चकेरी के वार्ड में यूरेनियम का स्तर 253.29, घाटमपुर में 114.14, गांधीग्राम में 92.88, चौबेपुर में 63.93 माइक्रोग्राम प्रति लीटर मिला है।
शहरी क्षेत्र यूरेनियम का स्तर
नानकारी (कल्याणपुर) 64.30
नवीन नगर 44.54
काकादेव 39.12
अफीम कोठी 35.39
सभी जगहों के हैंडपंप चालू, सैकड़ों लोग पीते पानी
आईआईटी के अधिकारियों के मुताबिक कानपुर और कानपुर देहात से लिए गए सारे सरकारी हैंडपंप चालू हालत में थे, उनसे रोजाना काफी संख्या में लोग पानी पीने, नहाने और अन्य कार्यों के लिए पानी का इस्तेमाल करते हैं। कुछ हैंडपंप तो बाजार और अति व्यस्त जगहों पर लगे हुए हैं, जहां का पानी होटल, ठेले और रेहड़ी वाले इस्तेमाल करते हैं। यह पानी स्थाई और अस्थाई तौर पर लोगों के पेट तक पहुंचता है।
आरओ में नहीं हैवी मैटल्स को साफ करने की क्षमता
विशेषज्ञों की माने तो पानी साफ करने के लिए बाजार में आ रहे वाटर प्युरिफायर, फिल्टर हैवी मैटल्स को साफ नहीं कर पाते हैं। अधिकतर पानी में टोटल डिसॉल्वड सॉलिड (टीडीएस) के स्तर को नियंत्रित करते हैं। ज्यादातर प्युरिफायर रिवर ऑसमोसिस तकनीक पर कार्य करते हैं, जिससे पानी को शुद्ध किया जाता है।
अब तक क्रोमियम, लिड, आर्सेनिक, निकिल को साफ करने की कोई ठोस तकनीक नहीं इजाद हुई है। वह भी जो आमजन के घरों तक पहुंच सके। ऐसे में यूरेनियम को पानी से साफ करना आसान नहीं है।
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