पीएम मोदी पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत ‘आईएनएस विक्रांत’ नौसेना में करेंगे शामिल, जानें खासियत

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चेन्नई।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां शुक्रवार (02 सितंबर) को पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत ‘आईएनएस विक्रांत’ को नौसेना में शामिल करेंगे। जो भारत के समुद्री इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा जहाज है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। मोदी यहां कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) के अंदर 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से …

चेन्नई।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां शुक्रवार (02 सितंबर) को पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत ‘आईएनएस विक्रांत’ को नौसेना में शामिल करेंगे। जो भारत के समुद्री इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा जहाज है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। मोदी यहां कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) के अंदर 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित इस विमान वाहक पोत को भारतीय नौसेना में शामिल करेंगे।

स्वदेशी विमानवाहक पोत विक्रांत के नौसेना में शामिल होने के साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो जाएगा जो स्वदेशी विमान वाहक डिजाइन और निर्माण करने की विशिष्ट क्षमता रखते है साथ ही यह ‘मेक इन इंडिया’ मुहिम का एक वास्तविक प्रमाण होगा।

यहां एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि कल जब प्रधानमंत्री आईएसी विक्रांत का जलावतरण करेंगे तो यह भारतीय नौसेना और संपूर्ण राष्ट्र के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा और यह ‘आत्मनिर्भरता’ भारत की प्रतिबद्धता को साकार करने के लिए एक ऐतिहासिक दिन होगा।

विमान वाहक पोत विक्रांत पूरी तरह से भारत में बनाया गया। यह अब तक का सबसे बड़ा युद्धपोत है। इसके अलावा भारतीय नौसेना के लिए स्वदेश में डिजाइन और निर्मित किया गया पहला युद्ध पोत है। विक्रांत को भारतीय नौसेना के आंतरिक संगठन युद्धपोत डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा डिज़ाइन किया गया है और बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन आने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) द्वारा निर्मित इस युद्ध पोत को इसके पूर्ववर्ती विमान वाहक पोत का नाम दिया गया है जिसने 1971 युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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