लखनऊ: चिनहट में भ्रष्टाचार को अंजाम देने वालों पर विजिलेंस का शिकंजा
लखनऊ। लेसा के सबसे कमाई वाले सर्किल दो और डिवीजन चिनहट में पूर्व की सरकार में तैनात अभियंताओं की विजिलेंस जांच हो रही है। हालांकि जांच तो काफी समय से हो रही है, लेकिन अब जांच में विजिलेंस कार्यालय की ओर से तेजी की बात कहीं जा रही है। विजिलेंस आफिसर जांच में तेजी लाते …
लखनऊ। लेसा के सबसे कमाई वाले सर्किल दो और डिवीजन चिनहट में पूर्व की सरकार में तैनात अभियंताओं की विजिलेंस जांच हो रही है। हालांकि जांच तो काफी समय से हो रही है, लेकिन अब जांच में विजिलेंस कार्यालय की ओर से तेजी की बात कहीं जा रही है। विजिलेंस आफिसर जांच में तेजी लाते हुए कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
विजिलेंस कार्यालय सूत्रों के अनुसार पॉवर कार्पोरेशन से विजिलेंस ने सपा सरकार में तैनात अभियंताओं के नामों को दोबारा से मांगें गए हैं। इसके साथ ही उस समय तैनात अभियंताओं के संपत्तियों का भी ब्योरा मांगा गया है। विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार पूर्व की सपा सरकार में चिनहट में अभियंताओं द्वारा किए गए कारनामों की जांच तो पहले ही चल रही थी, लेकिन धीमे थी। अब जांच में तेजी लाए जाने के आदेश दिए गए हैं और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही जा रही है।
बता दें कि लेसा का सबसे महत्वपूर्व और कमाई वाला सर्किल दो और डिवीजन चिनहट को माना जाता है। यहां पर तैनाती के लिए अभियंताओं और कर्मचारियों द्वारा जमकर जुगाड़ और कोशिशें की जाती हैं। यहां पर तैनाती के लिए प्रबंधन की तरफ से कई बार तो नियमों को दरकिनाकर कर दिया गया। जो सबसे अच्छा रिस्पॉंस दे सके उसकी तैनाती की जाती है।
अखिलेश की सरकार में जमकर डिवीजन के उपभोक्ताओं और डिवीजन का किया गया था दोहन
आपको बता दें कि चिनहत डिवीजन लेसा का सबसे कमाई वाला डिवीजन माना जाता है। पूर्व की सरकार में तैनात अभियंताओं ने जमकर उपभोक्ताओं और डिवीजन का दोहन किया था। यहां पर अभियंताओं और कर्मचारियों द्वारा मिलकर कई बड़े कारनामें कर दिए गए। बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया था। अभियंताओं और कर्मचारियों ने विभाग के सभी नियमों का दरकिनार कर हजारों की संख्या में लंबी दूरी, सोसाइटी, बिल्डरों और समितियों को अवैध तरीके से कनेक्शन जारी कर दिया।
आशतोष कुमार ने किया था खुलासा
यहां पर एक बड़ी बिजली चोरी का खुलासा उस दौरान मुख्य अभियंता रहे आशुतोष कुमार ने खुलासा किया था। जिसके बाद से कई और मामले सामने आ गए। आशुतोष ने एक बड़ी बिजली चोरी पकड़ी थी, जिसमे उपभोक्ता ने आरोप लगााते हुए बयान दिया था कि अभियंताओं और कर्मचारियों उसने बिजली चोरी के लिए नौ लाख रुपये दिए थे। जिसकी जांच हुई तो एक अवर अभियंता को संस्पेंड कर दिया गया।
हालांकि इन सभी मामलों में कई बड़े अभियंताओं का हाथ रहा, जिन्हे दबा दिया गया। वहीं सिर्फ अवर अभियंता को सस्पेंड और अधिशासी अभियंता को वहां से हटाकर खानापूर्ति कर दी गई। हालांकि उसके बाद इस मामले का विजिलेंस को दे दिया गया। जिसके बाद विजिलेंस जांच शुरू कर दी गई। लेकिन शासन के दबाव विजिलेंस जांच भी धीमी हो गई। वहीं यहां पर हुए कारनामें में शामिल कुछ अभियंताओं ने अपनी तैनाती शक्तिभवन में करवाकर मामले का दबाने की पूरी कोशिश की, लेकिन अब कहीं और से दबाव बनने के बाद विजिलेंस जांच में तेजी ला दी गई है।
जांच में तेजी ला दिया गया है, यहां पर हुए कारनामों में शामिल अभियंताओं और कर्मचारियों पर दोष सिद्ध होने पर कार्रवाई की जाएगी। यहां पर तैनात आधा दर्जन से ज्यादा अभियंता और बाबू जांच में शामिल हैं। इसके साथ ही इनकी संपत्तियों की भी जांच की जाएगी। -कमल सक्सेना, डीजी विजिलेंस
