गंगा और पांडु नदी में सीवेज रोकने में नाकाम कानपुर नगर निगम, 70 लाख जुर्माने की संस्तुति
कानपुर। शहर में गंगा और पांडु नदी में सीवेज रोकने में कानपुर नगर निगम नाकाम रहा है। नदी को निर्मल बनाने के लिए कानपुर में 1800 करोड़ रुपए से अधिक का बजट खर्च हो चुका है। लेकिन गंगा में अभी भी प्रतिदिन 10 करोड़ लीटर से ज्यादा प्रदूषित पानी और सीवेज गिर रहा है। पॉल्यूशन …
कानपुर। शहर में गंगा और पांडु नदी में सीवेज रोकने में कानपुर नगर निगम नाकाम रहा है। नदी को निर्मल बनाने के लिए कानपुर में 1800 करोड़ रुपए से अधिक का बजट खर्च हो चुका है। लेकिन गंगा में अभी भी प्रतिदिन 10 करोड़ लीटर से ज्यादा प्रदूषित पानी और सीवेज गिर रहा है। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड तीन महीने तक निगरानी करने के बाद अब नगर निगम पर 70 लाख का जुर्माना लगाने की संस्तुति की है। जिसके बाद नगर निगम के आलाअधिकारियों में हड़कंप मचा है।
हर महीने पांच लाख रुपए की दर से क्षतिपूर्ति
यूपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के कानपुर आरओ इंजीनियर अमित मिश्रा ने लखनऊ स्थित बोर्ड मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी है। रिपोर्ट के मुताबिक हर महीने 5 लाख रुपए की दर से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के तौर पर कुल 70 लाख रुपए जुर्माना लगाने की संस्तुति की है। बोर्ड ने 3 महीने तक लगातार गंगा और पांडु नदी में गिर रहे 6 नालों की निगरानी की और नगर निगम की जिसके बाद तथ्य निकलकर सामने आए हैं।
बायोरेमिडेशन प्रक्रिया को जानें
बायोरेमिडेशन प्रक्रिया में नालों के पानी को कई जगह रोक-रोक कर नदी में डाला जाता है। इसको साफ करने के लिए पानी में ऑक्सीजन बढ़ाने वाले केमिकल डाले जाते हैं। इसके अलावा अन्य केमिकल भी मिलाए जाते हैं जो बैक्टीरिया पैदाकर गंदगी नष्ट करते हैं। इससे गंगा के पानी में ऑक्सीजन की कमी नहीं होती है।
इन छह नालों की हुई निगरानी
रानीघाट नाला, शीतला बाजार नाला, बुढ़ियाघाट नाला, पनकी थर्मल नाला, ICI नाला, रतनपुर नाला
ऐसे हुई निगरानी और लगा जुर्माना
पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक 4 जुलाई से 22 अगस्त तक जांच में नगर निगम द्वारा रानीघाट नाला पर बायोरेमिडिएशन नहीं किया जा रहा था। ऐसे में 5 लाख रुपए प्रति माह की दर से 10 लाख रुपए पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का जुर्माना लगाया गया है। शीतला बाजार नाले की टैपिंग टूटी मिली। इसको 3 महीने के दौरान भी नहीं बनाया गया। ऐसे में रोजाना करीब 2 करोड़ लीटर प्रदूषित पानी गंगा में समाया। 15 लाख रुपए जुर्माना लगाया गया है।
रिपोर्ट में पाया गया कि बुढ़ियाघाट नाला नाला टैप है, लेकिन इसकी टैपिंग टूटी पाई गई, इसे नगर निगम द्वारा बनाया नहीं गया। 1 जून से 22 अगस्त तक रोजाना गंगा में नाले के माध्यम से प्रदूषित पानी गया। ऐसे में 15 लाख रुपए जुर्माना लगाया गया। वहीं, पनकी थर्मल नाला सीधे गंगा की सहायक नदी पांडु नदी में गिर रहा है। यहां कोई टैपिंग और सीवेज पंपिंग स्टेशन भी नहीं बना है। ऐसे में सीवेज सीधे पांडु नदी में गिर रहा है। 10 लाख रुपए जुर्माना लगाया गया।
ICI नाला पनकी औद्योगिक क्षेत्र और आवासीय क्षेत्र का सीवेज नाले के जरिए पांडु नदी में गिर रहा है। 4 जुलाई से नाले पर बायोरेमिडिएशन का कार्य भी बंद है। इस पर 10 लाख रुपए पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति नगर निगम पर लगाई गई है। पनकी रतनपुर नाले से रतनपुर क्षेत्र और आसपास क्षेत्र का सीवेज पांडु नदी में गिर रहा है। 4 जुलाई से नाले पर बायोरेमिडिएशन भी नहीं किया जा रहा है। नगर निगम की इस लापरवाही पर 10 लाख रुपए जुर्माना लगाया गया है।
बोले जिम्मेदार: नगर निगम गंगा में गिर रहे नालों को लेकर सजग है। टीमें काम कर रही हैं। कई जगह हमने सीवेज के पानी को नदी में गिरने से रोक लिया है। आर.के. सिंह, अधिशाषी अभियंता
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