UPCIDA Recruitment Scam: साक्षात्कार सूची में नाम नहीं, न ही इंटरव्यू दिया और पा गए नौकरी
अमृत विचार, कानपुर। उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण में 2008-2009 में हुई बैकलॉग की भर्तियों में कदम- कदम पर फर्जीवाड़ा हुआ था। एक तो साक्षात्कार की किसी भी समिति में डीएम के प्रतिनिधि को नहीं शामिल किया गया। दूसरे कई बार साक्षात्कार लेने के लिए विषय विशेषज्ञ मौजूद नहीं थे फिर भी लोगों को पास …
अमृत विचार, कानपुर। उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण में 2008-2009 में हुई बैकलॉग की भर्तियों में कदम- कदम पर फर्जीवाड़ा हुआ था। एक तो साक्षात्कार की किसी भी समिति में डीएम के प्रतिनिधि को नहीं शामिल किया गया। दूसरे कई बार साक्षात्कार लेने के लिए विषय विशेषज्ञ मौजूद नहीं थे फिर भी लोगों को पास कर दिया गया।
प्री क्वालीफाई अभ्यर्थियों की सूची में नाम न होने होने के बाद भी कुछ अभ्यर्थियों को नौकरी दे दी गई। ये गलतियां मार्च 2017 में तत्कालीन आयुक्त एवं निदेशक हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग द्वारा शासन को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में सामने आईं थीं, लेकिन नियुक्तियों को रद करने के बजाय जांच रिपोर्ट दबा दी गई और अब विजिलेंस को जांच सौंपकर फिर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली गई।
प्रबंधक सामान्य के पद पर चयनित मनीष कुमार लाखा का नाम प्री क्वालीफाईड अभ्यर्थियों की सूची में नहीं था। किंतु साक्षात्कार एवं चयनित अभ्यर्थियों की सूची में उनका नाम जोड़ दिया गया और वे आराम से नौकरी कर रहे हैं। उप प्रबंधक सामान्य रामेंद्र कुशवाहा के चयन के लिए हुए साक्षात्कार में अनुसूचित जाति के सदस्य आशीष नाथ चयन समिति की बैठक में आए ही नहीं थे तो सहायक श्रेणी द्वितीय पद के लिए हुए साक्षात्कार में चयन समिति की बैठक में अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्य के रूप में डॉ. अनिल कुमार उपस्थित नहीं हुए थे।
अभ्यर्थी गीता वर्मा अनियमित रूप से दोबारा लिए गए साक्षात्कार में उपस्थित नहीं हुईं थीं पर उनका नाम अतिरिक्त जोड़ते हुए उन्हें नौकरी दे दी गई। लेखालिपिक पद पर ललित कुमार वर्मा की नियुक्ति रिक्त पद के अधिक की गई है तो उप प्रबंधक समान्य के पद पर राजेश कुशवाहा को रिक्त पद न होने के बाद भी नियुक्त कर दिया गया। शैक्षिक प्रमाण पत्र फर्जी होने के आरोप में बर्खास्त हो चुके सचिन सिंह को भी इसी पद पर रिक्त पद न होने के बाद भी चयिनत किया गया था।
आयुक्त एवं निदेशक रहे रणवीर प्रसाद ने अपनी जांच रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि तत्कालीन प्रबंध निदेशक , संयुक्त प्रबंध निदेशक और प्रभारी अधिकारी कार्मिक ने मिलीभगत कर नियुक्तियों में गड़बड़ी की। 2008 में 105 लोगों की नियुक्ति हुई थी इनमें से 80 से ज्यादा लोग तत्कालीन चेयरमैन बाबू सिंह कुशवाहा और प्रभारी अधिकारी कार्मिक अजीत सिंह पटेल की स्वजातीय थे या उनसे करीबी थे।
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