शिक्षक दिवस पर विशेष: सुगम की चाह नहीं, 34 साल से दुर्गम में सेवा दे रहे हैं बागेश्वर के शिक्षक महेश
सुरेश पांडेय, हल्द्वानी। शहर के नजदीक सुविधाजनक स्थान पर सेवा के लिए शिक्षक विभागीय अधिकारियों के चक्कर काटते रहते हैं। कई शिक्षक तो सुगम के लिए मेडिकल तक का सहारा लेते हैं लेकिन, बागेश्वर के जूनियर हाईस्कूल हरखोला के शिक्षक महेश वर्मा बीते 34 सालों से दुर्गम के विद्यालयों में सेवा कर अन्य शिक्षकों के …
सुरेश पांडेय, हल्द्वानी। शहर के नजदीक सुविधाजनक स्थान पर सेवा के लिए शिक्षक विभागीय अधिकारियों के चक्कर काटते रहते हैं। कई शिक्षक तो सुगम के लिए मेडिकल तक का सहारा लेते हैं लेकिन, बागेश्वर के जूनियर हाईस्कूल हरखोला के शिक्षक महेश वर्मा बीते 34 सालों से दुर्गम के विद्यालयों में सेवा कर अन्य शिक्षकों के लिए मिसाल पेश कर रहे हैं।
मूल रूप से चौखुटिया तहसील के भगौती गांव निवासी शिक्षक महेश वर्मा को वर्ष 1988 में प्राथमिक विद्यालय नाली में पहली बार नियुक्ति मिली थी। जो कि दुर्गम श्रेणी का विद्यालय था। उसके बाद उन्होंने अपनी सभी सेवाएं दुर्गम क्षेत्र के विद्यालयों में दी। शिक्षक महेश वर्मा का मानना है कि दुर्गम क्षेत्र के विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे भी अच्छी शिक्षा तथा अच्छे शिक्षकों के हकदार हैं। इसलिए उन्होंने दुर्गम क्षेत्र में सेवा देने का निर्णय लिया है। शिक्षक महेश वर्मा बताते हैं कि उन्होंने सुगम क्षेत्र के विद्यालयों में जाने के लिए प्रयास भी नहीं किया।
इन विद्यालयों में दी है सेवा
जूनियर हाईस्कूल पुड़कूनी- 13 साल
जूनियर हाईस्कूल पगना- 10 साल
जूनियर हाईस्कूल हरखोला- 11 साल
छात्रवृत्ति परीक्षा में अव्वल आते हैं बच्चे
शिक्षक महेश वर्मा ने जिन विद्यालयों में अपनी सेवा दी है उन विद्यालयों के बच्चे छात्रवृत्ति परीक्षा सहित अन्य परीक्षाओं में अव्वल आते हैं। अभिभावक भी महेश वर्मा के शिक्षण शैली से प्रभावित रहते हैं।
माता, पिता से मिला सेवा का संस्कार
दूरस्थ क्षेत्र के विद्यालयों में सेवा करने का जज्बा उन्हें अपनी माता सरस्वती देवी तथा पिता शिवलाल वर्मा से मिला है। शिक्षक महेश वर्मा बताते हैं कि माता पिता ने बचपन से ही गरीब व बेसहारा लोगों की सेवा के संस्कार दिए हैं।
