चीन की नरमी

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Edited By Amrit Vichar
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पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना के साथ भारतीय सेना की टकराहट के बीच सारी कवायद अब 6 जून को लेफ्टिनेंट स्तर के अधिकारियों की बातचीत पर टिक गई है। हालांकि चीन बुधवार को वास्तविक नियंत्रण रेखा से दो किमी पीछे तो हट गया, मगर अब भी समस्या का स्थायाी समाधान नहीं निकला है। दरअसल चीन …

पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना के साथ भारतीय सेना की टकराहट के बीच सारी कवायद अब 6 जून को लेफ्टिनेंट स्तर के अधिकारियों की बातचीत पर टिक गई है। हालांकि चीन बुधवार को वास्तविक नियंत्रण रेखा से दो किमी पीछे तो हट गया, मगर अब भी समस्या का स्थायाी समाधान नहीं निकला है। दरअसल चीन की हमेशा कोशिश रही है कि वह धीरे-धीरे अपनी सेना भारत की ओर भेजकर उसकी जमीन पर कब्जा करे। ताजा घटनाक्रम भी चीन की इसी रणनीति और उसकी चाल का हिस्सा है। वास्तविक नियंत्रण रेखा से 2 किमी आगे आते हुए जब चीन की सेना ने वहां अपने टैंट तक गाड़ दिये तो भारत की फौज भी आगे बढ़ गई। इससे चीन और भारत के सैनिक आमने-सामने ही आ गए।

इससे पहले जब भी ऐसा हुआ था तो कमान अधिकारी की स्तर से ही वार्ता कर मुद्दा सुलझ जाता था। मगर इस बार ऐसा नहीं था और चीन ने इस स्तर की बातचीत से इनकार कर दिया। इसका मतलब साफ था कि यह वास्तविक नियंत्रण रेखा पर दो देशों के बीच आए दिन होने वाली नोक-झोंक नहीं बल्कि यहां मामला सीधे चीन की राजधानी से नियंत्रित था। यहां से यह कयास लगाने शुरू हो गए कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दुनियाभर में कहर मचा रहे कोरोना संक्रमण में चीन की लापरवाही की तरफ से ध्यान हटाकर उसे कहीं और केंद्रित करना चाहते हैं।

उनकी कोशिश यह थी कि आक्रामकता के साथ युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न की जाए जिससे सारा ध्यान उस तरफ चला जाए और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान कोरोना से भटकाया जा सके। उन्हें यह भी पता था कि इस गतिरोध को चीन जब चाहे खत्म कर सकता है क्योंकि वास्तविक नियंत्रण रेखा उसके ही सैनिकों ने पार की है। चीनी राष्ट्रपति की मंशा चाहे जो रही हो मगर चीन के इरादे बिलकुल भी नेक नहीं थे, यह साफ है।

शि जिनगिंप की इस चाल से भारत समझ गया कि कूटनीतिक स्तर के साथ ही सैन्य स्तर पर भी चीन को उसके तरीके से ही जवाब दिया जाए। उसी कूटनीति का नतीजा रहा कि चीन ने न केवल अपनी सेना की पीछे हटाया बल्कि वह इस मुद्दे पर वार्ता के लिए भी तैयार हो गया। देश के लिए यह मामला काफी संवेदनशील है लिहाजा उम्मीद की जानी चाहिए कि मामले का उचित समाधान निकले। साथ ही चीन को संदेश भी साफ चला जाना चाहिए कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सब कुछ उसकी मनमर्जी के हिसाब से नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय नियमों के तहत ही होगा। रही बात युद्ध की तो चीन को भी अच्छी तरह से पता है कि भारत के साथ युद्ध होने की स्थिति में उसे कितना बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है और युद्ध अव्यावहारिक है।