बरेली: बोर्ड बैठक से पहले बार में बैठे थे सपा-भाजपा पार्षद, फोटो वायरल
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम में जनहित के मुद्दों पर बोर्ड बैठक में खुलकर चर्चा नहीं हो पाती, इसलिए सपा और भाजपा के पार्षद बार में बैठकर चर्चा करने लगे हैं। समाजवादी पार्टी में वरिष्ठ नेता इसे अनुशासनहीनता बताते हैं तो कुछ का कहना है कि बार में जनहित के नहीं स्वहित के मुद्दों पर …
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम में जनहित के मुद्दों पर बोर्ड बैठक में खुलकर चर्चा नहीं हो पाती, इसलिए सपा और भाजपा के पार्षद बार में बैठकर चर्चा करने लगे हैं। समाजवादी पार्टी में वरिष्ठ नेता इसे अनुशासनहीनता बताते हैं तो कुछ का कहना है कि बार में जनहित के नहीं स्वहित के मुद्दों पर चर्चा की जाती है। निगम में पार्षदों का अपना अलग कक्ष है। उपसभापति का कक्ष है।
इन जगहों को छोड़कर बोर्ड बैठक से पहले बार में चर्चा करना बताता है कि दाल में कुछ काला है। इस चर्चा को बल मिला है एक फोटो वायरल होने से। फोटो में सपा पार्षद गौरव सक्सेना, शमीम अहमद, सलीम पटवारी, भाजपा के महेश राजपूत, छंगामल मौर्य, कपिल कांत आदि बार में बातचीत में मशगूल हैं। तीन दिन पहले हुई बोर्ड बैठक में कोर्ट में चल रहा एक प्रस्ताव लाया गया।
इसे भाजपा पार्षद और उपसभापति महेश राजपूत लाए थे। इसमें प्रस्तावक के रूप में सपा के गौरव सक्सेना और सलीम पटवारी के भी हस्ताक्षर स्पष्ट नजर आ रहे हैं। बैठक में जब यह प्रस्ताव लाया गया, तब सपा पार्षद दल के नेता राजेश अग्रवाल ने मोशन दिया और बैठक से बाहर चले गए।
तब पार्षद गौरव ने कहा था कि दल के नेता बैठक छोड़कर चले गए। उन्हें मोशन देना था तो पार्षदों के साथ बैठक करते। उन्होंने ऐसा नहीं किया और अकेले मोशन देकर चले गए। कोई जानकारी नहीं थी, इसलिए सभी पार्षद बैठे रहे। अब दो दिन बाद फोटो वायरल होने के बाद सपा पार्षदों का दावा गलत साबित हो रहा है।
कुछ साथी मनमुटाव दूर कर समझौता करा रहे हैं तो बुरा क्या है
पार्षद राजेश अग्रवाल ने बताया कि उपसभापति व भाजपा पार्षदों के प्रस्ताव पर जिन सपा पार्षदों ने पार्टी अध्यक्ष से पूछे बिना हस्ताक्षर कर दिए। जब पार्टी के प्रमुख लोग ही पार्टी विरोधी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर देंगे तो ऐसे लोगों के साथ बैठक करने का क्या औचित्य है। पार्षद गौरव सक्सेना ने कहा कि कुछ लोग वायरल फोटो को मुद्दा बना रहे हैं। हम कुछ साथी कहीं बैठकर कुछ पी रहे हैं और मनमुटाव दूर कर समझौता करा रहे हैं तो इसमें बुरा क्या है।
सपा के मेयर ही 2003 में लाए थे प्रस्ताव
उपसभापति और भाजपा के पार्षद जिस सिटी हास्पिटल के प्रस्ताव को लाए थे। उसे सपा के मेयर डॉ. आईएस तोमर लाए थे। उस समय भी सपा सरकार थी और सपा के सच्चे सिपाही होने का दावा करने वाले पार्षदों ने अपने ही मेयर के प्रस्ताव को रद कराने वाले प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिया।
चर्चा है कि बंद कमरे, होटल और बार में होने वाली बैठकें जनहित की होगी, इसे कहना बेईमानी है। भाजपा और सपा पार्षदों का एक बार में बैठना यह दर्शाता है कि पार्षदों ने जनहित के बजाए स्वहित पर ध्यान देने के लिए एकजुटता बनाई है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक भाजपा नेता तो कहते हैं कि सपा में अनुशासन है नहीं, इसलिए पार्षद तो क्या सभी नेता अनुशासनहीन हो चुके हैं। कार्रवाई का डर नहीं है। नेता भी दमदार नहीं रहे, इसलिए सब आजाद हैं।
कार्यकारिणी की इसी माह बैठक हाेने वाली है। जनहित के मुद्दों पर चर्चा करने को एक बार में बैठे थे। जनहित के किन मुद्दों पर होटल में चर्चा हो रही थी। कई मुद्दे थे। दरअसल, हमारे पार्षद राजकुमार गुप्ता और छंगामल मौर्य के बीच एक प्रस्ताव लगाने को लेकर विवाद था। एक पार्षद प्रस्ताव लगाने को कह रहे थे दूसरे लगने नहीं दे रहे थे, इसलिए कार्यकारिणी के सदस्य समझौता कराने बैठे थे। कार्यकारिणी में सलीम पटवारी तो हैं नहीं। वो ऐसे ही चले आए थे—महेश राजपूत, उपसभापति व भाजपा पार्षद।
नगर निगम में भाजपा के प्रस्तावों पर सपा के महत्वपूर्ण निवर्तमान पदाधिकारी व पार्षद हस्ताक्षर करेंगे तो फिर विपक्ष कहां रहा। हम भाजपा के प्रस्ताव का विरोध करते आ रहे हैं और निगम में उसी प्रस्ताव को सपा पार्षद पास कराने में हस्ताक्षर कर रहे हैं। यह गलत है। अनुशासनहीनता है। इसकी जांच कराई जाएगी। निकाय चुनाव के समय सपा के पार्षद-भाजपा के हर गलत काम में सहयोग करेंगे तो निकाय चुनाव में जनता से सपा क्या कहकर वोट मांगेगी—शमीम सुल्तानी, निवर्तमान महानगर अध्यक्ष, सपा।
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