बरेली: अमृत विचार की मुहिम ने लाई रंग, दान की जमीन पर बनेगा 20 बेड का अस्पताल

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बरेली,अमृत विचार। शहामतगंज में पेट्रोल पंप के पास करीब 182 साल पहले दान की गई भूमि पर अस्पताल बनवाने के लिए अमृत विचार की मुहिम रंग लाई। इस भूमि पर 20 बेड का अस्पताल बनेगा। शासन के निर्देश पर शुक्रवार को मेयर डा. उमेश गौतम और सीएमओ डा. बलवीर सिंह ने भूमि का निरीक्षण किया। …

बरेली,अमृत विचार। शहामतगंज में पेट्रोल पंप के पास करीब 182 साल पहले दान की गई भूमि पर अस्पताल बनवाने के लिए अमृत विचार की मुहिम रंग लाई। इस भूमि पर 20 बेड का अस्पताल बनेगा। शासन के निर्देश पर शुक्रवार को मेयर डा. उमेश गौतम और सीएमओ डा. बलवीर सिंह ने भूमि का निरीक्षण किया। भूमि देखने के बाद सीएमओ ने कहा कि हम अस्पताल के लिए जमीन तलाश ही रहे थे। शहर के बीच में अच्छी जगह मिली है। यहां अस्पताल बनाया जाएगा। मेयर ने कहा कि इस जमीन पर अस्पताल का बेहतर नक्शा बनवाइए। नक्शा ऐसा हो ताकि जरूरत पड़ने पर मल्टी स्टोरी अस्पताल खड़ा किया जा सके। निरीक्षण के दौरान जमीन दानदाता परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे।

अमृत विचार ने दान की भूमि पर अस्पताल की जगह दुकानें खुलने की पहली खबर 23 मई के अंक में प्रकाशित की थी। एक दिन बाद 25 मई को मेयर डा. उमेश गौतम ने उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा मंत्री बृजेश पाठक को पत्र लिखकर बंद पड़े अस्पताल की जमीन पर सामुदायिक स्वास्थ्य केद्र या प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चलाने की अनुमति देने का आग्रह किया था।

इसी पत्र पर शासन ने जुलाई 22 में संज्ञान लिया। महानिदेशक चिकित्सा व स्वास्थ्य सेवाएं का पत्र 14 सितंबर को मेयर के पास भेजा, इसमें शहामतगंज में बंद पड़े अस्पताल की जमीन पर सामुदायिक केन्द्र चलाने का प्रस्ताव मांग लिया है। इसी पत्र के क्रम में मेयर ने सीएमओ के साथ मौके का निरीक्षण किया।

टायर वालों को बुलाकर पूछा कैसे मिलीं दुकानें
दान की जमीन पर अस्पताल बंद करके जिला पंचायत ने यहां दुकानें खुलवा दी थीं। यहां अधिकतर टायर वालों की दुकानें हैं। मेयर डा. उमेश गौतम ने दुकानवालों को बुलाकर पूछा कि दुकानें कैसे मिलीं। दुकानदारों ने बताया कि जिला पंचायत ने लीज पर दी है। कितने समय के लिए लीज पर है। इस पर कहा कि यह तो कागज पर लिखा होगा। मेयर ने कहा कि इनके कागज देखेंगे। जिनकी लीज जहां तक होगी उसे दुकान चलाने देंगे। लेकिन लीज को अब आगे नहीं बढ़ाएंगे।

मेयर ने ली चुटकी, बोले- पीयूष के परदादा सपने में आए
मौके पर मेयर डा. उमेश गौतम ने चुटकी भी ली। बोले- पीयूष अग्रवाल के परदादा सपने में आए। बोले- जो जमीन अस्पताल के लिए दान में दी थी उस पर अस्पताल नहीं चल रहा। पीयूष ने यह बात मुझे बताई थी। मैंने कहा कि दादा जी का सपना पूरा करुंगा और आज वह समय आ गया है कि परदादा जी ने जो जमीन अस्पताल के लिए दान की थी, उसमें अस्पताल खुलाने जा रह रहा है।

सीएमओ डा. बलवीर सिंह ने बताया कि नगर निगम पहले हमें जमीन हैंडओवर करेगा। हम उस पर अस्पताल बनाएंगे। यह सीएचसी की तरह काम करेगा। 20 बेड का अस्पताल बनाया जाएगा। जमीन स्वास्थ्य विभाग को मिलते ही एस्टीमेट बनाना शुरू कर दिया जाएगा। एस्टीमेट में जमीन का जिक्र भी करना पड़ेगा।

योगी राज में 55 साल बाद परदादा का सपना पूरा होता दिख रहा : पीयूष
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राज में मेरे परदादा सेठ कुमाऊंमल का सपना सच होने जा रहा है। इस सपने को सच होने में 55 साल लग गए। परदादा की जमीन पर अस्पताल खुलने जा रहा है। यह बात पीयूष अग्रवाल ने कही। उनके ही परदादा ने 1840 में शहामतगंज में अस्पताल के लिए जमीन दान दी थी।

उन्होंने बताया कि 1967 तक शहामतगंज में अस्पताल चलता था। इसके बाद इसे बंद कर दिया और कुछ समय बाद इसी जमीन पर दुकानें खुल गईं। दादा जी ने नगर पालिका को जमीन दान दी थी। नगर पालिका ने जिला परिषद को जमीन लीज पर दे दी। परिषद ने लीज शर्तों का उल्लघंन करते हुए जमीन पर दुकानें खुलवा दीं। बताया कि जब से होश संभाला तब से यहां अस्पताल खुलवाने के लिए प्रयासरत हूं। इसके पहले उनके पिता जी ने काफी पत्राचार किया था।

पीयूष ने बताया कि उन्होंने बरेली में तत्कालीन स्वास्थ्यमंत्री को पत्र देकर अस्पताल खुलवाने की मांग की थी, लेकिन कुछ नहीं हो पाया। 23 मई 22 से एक खबर प्रकाशित होने और मेयर डा. उमेश गौतम के संज्ञान लेने के बाद इसमें प्रगति होती गई। इस मामले में कैंट विधायक ने भी पत्र लिखा था।

शुक्रवार को जब वह परदादा द्वारा दान की जमीन अस्पताल खुलवाने के उद्देश्य से आए तो अंदर से महसूस हुआ कि उनका सपना पूरा हो रहा है। उनके साथ उनके चचेरे भाई अविनाशी, बृजवासी, पंकज और नीरज भी थे। सभी की आंखें खुशी के आंसू से नम हो गईं। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार जताया।

निगम के अभिलेखों में दर्ज है जमीन
दानदाता स्व. सेठ कुमाऊंमल की यह जमीन 3664 वर्ग गज निगम की संपत्ति के रूप में दर्ज है। यह भी दर्ज है कि 1840 में नगर पालिका को दान दी गई थी। यह भूमि 1918 में नगर पालिका ने 99 वर्ष की लीज पर जिला परिषद को अस्पताल चलाने को दी थी। लीज की शर्त के अनुसार 30-30 साल में भूमि की लीज का नवीनीकरण कराना था। यह नहीं कराया गया। लीज की शर्तों का उल्लंघन करते हुए अस्पताल की भूमि पर दुकानों का भी निर्माण कराया गया है। जिला परिषद ने मौजूदा समय यहां दुकानें बनवा दी हैं। पहले यहां यूपी एग्रो को किराये पर जगह दी गई। मौजूदा समय यहां पर जिला सहकारी बैंक, टायरों के गोदाम व अन्य दुकानें भी हैं। इस जमीन की मौजूदा कीमत एक अरब 57 करोड़ 90 लाख रुपये है।

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