लखीमपुर-खीरी: निघासन कांड मामले में 14 घंटे की कस्टडी रिमांड मंजूर, बढ़ी अपहरण की धारा

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अमृत विचार, लखीमपुर-खीरी। दो नाबालिग सगी बहनों की दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में चार आरोपियों को एडीजे मोहन कुमार की कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने विवेचक की तरफ से दाखिल रिमांड अर्जी पर सुनवाई के बाद 14 घंटे की रिमांड स्वीकृत की है। यह रिमांड बुधवार की सुबह सात बजे से शुरू …

अमृत विचार, लखीमपुर-खीरी। दो नाबालिग सगी बहनों की दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में चार आरोपियों को एडीजे मोहन कुमार की कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने विवेचक की तरफ से दाखिल रिमांड अर्जी पर सुनवाई के बाद 14 घंटे की रिमांड स्वीकृत की है। यह रिमांड बुधवार की सुबह सात बजे से शुरू होगी और रात नौ बजे तक रहेगी। एसआईटी ने जेल पहुंचकर कागजी कार्रवाई शुरू कर दी है। कोर्ट ने विवेचक की ओर से धारा तब्दीली के लिए दी गई अर्जी भी मंजूर कर ली है। अदालत ने सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के लिए अपहरण की धारा बढ़ाई है।

विवेचक संजय नाथ तिवारी ने धाराओं में तब्दीली करने की रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसे एएसपी अरुण कुमार सिंह ने संस्तुति देते हुए अदालत में आरोपियों पर सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के लिए अपहरण की धाराएं बढ़ाने का निर्देश दिया था। सोमवार को निघासन पुलिस ने कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी, जिसकी सुनवाई मंगलवार को हुई। सुनवाई के दौरान आरोपी और विवेचक संजय नाथ तिवारी के साथ ही एसआईटी के सदस्य भी मौजूद रहे।

कोर्ट ने धाराओं की तब्दीली करने वाली अर्जी को मंजूर कर लिया। दुष्कर्म और हत्या की जांच कर रहे हैं संजय नाथ तिवारी ने कोर्ट में अर्जी देते हुए आरोपियों को मौके पर पूछताछ के लिए ले जाने और सीन रीक्रिएशन करने के लिए 72 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी थी, जिसे अदालत ने आरोपियों के सामने ही सुनवाई करते हुए पुलिस कस्टडी रिमांड की अर्जी मंजूर कर ली है।

कोर्ट ने आरोपियों को शारीरिक उत्पीड़न ना करने का भी आदेश दिया है। एडीजीसी बृजेश पांडेय ने विवेचना के लिए जेल से आरोपियों को मौके पर ले जाने पर जोर दिया, जिसे मंजूरी देते हुए अदालत ने बुधवार की सुबह 7:00 बजे से रात 9:00 बजे तक आरोपियों को पुलिस कस्टडी मंजूर कर ली।

आरोपियों ने पुलिस कस्टडी रिमांड पूछताछ के नाम पर उत्पीड़न करने की बात कही, जिस पर अदालत ने कहा है कि आरोपी अपने साथ अधिवक्ता रख सकते हैं, लेकिन वह इतनी दूरी पर रहेंगे कि वह पूछताछ के लिए लाए गए आरोपियों को देख तो सके, लेकिन पुलिस या विवेचना से जुड़े अधिकारी और आरोपी बंदी के बीच बातचीत नहीं सुन सके।

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