मुरादाबाद : शिक्षकों की कमी से संकट में विद्यार्थी, अधर में भविष्य
मुरादाबाद,अमृत विचार। राजकीय इंटर कॉलेजों में सरकार की उदासीनता छात्रों पर भारी पड़ रही है। विद्यालयों में छात्रों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की संख्या बेहद कम है। सृजित पद के सापेक्ष महज 35 फीसदी शिक्षक ही तैनात हैं। लेकिन, वित्तविहीन इंटर कालेजों के हालात तो इनसे भी बदतर हैं। बावजूद इसके बोर्ड परीक्षा …
मुरादाबाद,अमृत विचार। राजकीय इंटर कॉलेजों में सरकार की उदासीनता छात्रों पर भारी पड़ रही है। विद्यालयों में छात्रों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की संख्या बेहद कम है। सृजित पद के सापेक्ष महज 35 फीसदी शिक्षक ही तैनात हैं। लेकिन, वित्तविहीन इंटर कालेजों के हालात तो इनसे भी बदतर हैं। बावजूद इसके बोर्ड परीक्षा परिणाम में वित्तविहीन स्कूलों के विद्यार्थी ही टॉप-10 में जगह बनाने में आगे रहते हैं। राजकीय विद्यालयों के विद्यार्थी काफी पीछे रहे हैं। ऐसे में राजकीय शिक्षकों की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। वहीं जिम्मेदारी अधिकारी भी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के बजाय मौन हैं। ऐसे में विद्यार्थियों का भविष्य संकट में है।
जिले में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्ध 437 स्कूल-कालेज हैं। इनमें 38 राजकीय विद्यालय है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में छठी से लेकर 12वीं तक 10 हजार विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया। कोरोना काल के बाद पंजीकरण की संख्या में इजाफा हुआ है। वहीं सरकार ने भी इसके बाद विद्यालयों को पंजीकरण का लक्ष्य दिया था। विभागीय आंकड़ों की माने तो विद्यालय में 507 सहायक अध्यापक और प्रवक्ता के पद स्वीकृत है। इसमें वर्तमान में 176 पद अध्यापक और प्रवक्ता कार्यरत हैं।
मंत्री ने भी जताई थी नाराजगी
जून में जारी हुए यूपी बोर्ड के 10वीं और 12वीं के परिणाम में राजकीय इंटर कॉलेजों से एक भी छात्र या छात्रा का नाम जनपद की मेरिट सूची में शामिल नहीं था। इसको लेकर माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने भी नाराजगी व्यक्त की थी। उन्होंने शिक्षकों को सुधार करने और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मुहैया कराने के निर्देश दिए थे।
हर माह होता है सवा दो करोड़ का भुगतान
राजकीय विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाचार्य और शिक्षकों को प्रतिमाह सवा दो करोड़ रुपये का वेतन के रूप में भुगतान किया जा रहा हैं। इसके बावजूद कुछ शिक्षक अपने दायित्व के प्रति संवेदनशील नहीं है। कुछ विद्यालयों में तो विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा तक मुहैया नहीं हो पा रही है।
प्रयोगशाला भी नाम की
जिले में 38 राजकीय विद्यालयों में प्रयोगशाला की बात करें तो 33 विद्यालयों में प्रयोगशाला तो हैं लेकिन वह सिर्फ नाम की हैं। यहां न तो विद्यार्थियों को नियमित प्रैक्टिकल ही कराया जाता है। न ही प्रैक्टिस। यह प्रयोगशाला बोर्ड के प्रैक्टिकल के समय ही खुलती हैं।
नहीं है खेल के मैदान
सरकार भले ही खेल को बढ़ावा दे रही हो लेकिन, स्कूलों में खेल के मैदान नहीं होने के कारण विद्यार्थियों की प्रतिभा नहीं निखर पा रही है। जिले के राजकीय विद्यालयों की बात करें तो 38 में से मात्र आठ विद्यालयों में ही खेल के मैदान है।
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