बरेली: निगम ने सील की दुकान, सदमे में दुकानदार ने तोड़ा दम
बरेली,अमृत विचार। नगर निगम ने तानाशाही के साथ कार्रवाई करते हुए एक दुकान को सील कर दिया। इससे दुकान स्वामी की आमदनी का जरिया बंद हो गया और वह सदमे में आ गया। मढ़ीनाथ निवासी बीमार दुकानदार की शुक्रवार को मौत हो गई। नगर निगम के अधिकारियों को पिता की मौत के लिए दोषी मानते …
बरेली,अमृत विचार। नगर निगम ने तानाशाही के साथ कार्रवाई करते हुए एक दुकान को सील कर दिया। इससे दुकान स्वामी की आमदनी का जरिया बंद हो गया और वह सदमे में आ गया। मढ़ीनाथ निवासी बीमार दुकानदार की शुक्रवार को मौत हो गई। नगर निगम के अधिकारियों को पिता की मौत के लिए दोषी मानते हुए बेटे ने नगर निगम की कार्रवाई के विरोध में 24 घंटे तक लाश का अंतिम संस्कार नहीं किया। मोहल्ले के लोगों ने समझाया तब बेटे ने पिता के शव का अंतिम संस्कार किया।
उच्च न्यायालय ने कोविड-19 महामारी के दौरान किसी भी बेदखली पर रोक के निर्देश दिये हुए हैं। इसके बावजूद बीती 5 जून को नगर आयुक्त के आदेश पर नगर निगम के कर्मचारीमय पुलिस बल के साथ उमेश कांत सक्सेना की मढ़ीनाथ स्थित दुकान पर जा धमके और दुकान को अवैध कब्जा बताते हुए तोड़ने की धमकी दी बाद में उसे कब्जे में लेकर सील कर दिया।
कोरोना महामारी के दौरान तंगहाली मे परिवार का गुजारा इस दुकान के जरिए हो रहा था। वह भी नगर निगम ने बंद कर छीन लिया। इसी सदमे में पहले से ही बीमार चल रहे उमेश ने बीते शुक्रवार की सुबह दम तोड़ दिया। बेटे ने नगर निगम की इस गैर जिम्मेदाराना कार्रवाई का विरोध करते हुए सभी अफसरों से न्याय की गुहार की थी। न्याय न मिलने पर हताश होकर 30 जून को राष्ट्रपति को पत्र भेजकर इच्छामृत्यु की मांग भी की।
उमेश कांत के बेटे ने बीती 3 जुलाई को एसएसपी को पत्र भेजकर बताया कि मढ़ीनाथ पुलिस चौकी के पास वह व उसके मृत पिता बीते 20 वर्षों से जनरल स्टोर की दुकान चलाते थे। 5 जून 2020 को निगम की टीम को दुकान का रजिस्टर्ड बैनामा दिखाने के बाद भी कर्मचारियों ने जबरन उसे दुकान से खींच लिया व दुकान को सील कर दिया।
पिता पहले से ही बीमार थे इलाज चल रहा था आमदनी का जरिया छिन जाने से इलाज नहीं हो सका। इलाज के अभाव में पिता का देहांत हो गया। उन्होंने निगम कर्मचारियों व नगर आयुक्त के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की थी किंतु कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
