किसानों को उपकरण और बाजार तक ढुलाई की सुविधा मिले: मोदी

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों तक कृषि उपकरणों की पहुंच आसान बनाने और उनकी फसल के खेत से बाजार तक के लिए ढुलाई सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। पीएम मोदी ने वीडियो कांफ्रेन्स के माध्यम से देश में कृषि के क्षेत्र में अनुसंधान, विस्तार और शिक्षा की प्रगति की समीक्षा के …

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों तक कृषि उपकरणों की पहुंच आसान बनाने और उनकी फसल के खेत से बाजार तक के लिए ढुलाई सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। पीएम मोदी ने वीडियो कांफ्रेन्स के माध्यम से देश में कृषि के क्षेत्र में अनुसंधान, विस्तार और शिक्षा की प्रगति की समीक्षा के दौरान यह बात कही।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं विस्तार विभाग में सचिव डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने प्राथमिकताओं, प्रदर्शन और विभिन्न चुनौतियों से निपटने की तैयारियों पर प्रस्तुतीकरण दिया। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिए कि कृषि उपकरणों की पहुंच आसान बनाई जानी चाहिए और खेत से बाजार तक के लिए ढुलाई सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए। इस संबंध में कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग ने ‘किसानरथ’ ऐप पेश किया है।

उन्होंने क्लस्टर आधारित रणनीति पर जैविक और प्राकृतिक कृषि प्रक्रियाओं को अपनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कृषि एवं सहायक क्षेत्रों में नवाचार और तकनीक का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए स्टार्ट-अप्स और कृषि उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए। किसानों की मांग पर सूचना उपलब्ध कराने में सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग की आवश्यकता का भी उन्होंने उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि चिह्नित समस्या के समाधान और टूल्स तथा उपकरणों की डिजाइन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए वर्ष में दो बार हैकॉथन का आयोजन किया जा सकता है, जिससे कृषि कामगारों में महिलाओं की बड़ी संख्या को देखते हुए खेती में काम के बोझ को कम किया जा सकता है।

उन्होंने सेहतमंद खुराक सुनिश्चित करने के लिए ज्वार, बाजरा, रागी और कई अन्य अनाज को शामिल करने के संबंध में जागरूकता फैलाने की जरूरत पर जोर दिया। पानी के इस्तेमाल में दक्षता बढाने के क्रम में प्रधानमंत्री ने जागरूकता और विस्तार कार्यक्रम कराए जाने की इच्छा प्रकट की।

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2014 से अब तक आईसीएआर के विभिन्न केन्द्रों के अनुसंधान के आधार पर क्षेत्रीय फसलों (1434), बागवानी फसलों (462) और जलवायु आधारित (1121) प्रजातियों का विकास किया जा चुका है। कई तरह की मुश्किलें सहने में सक्षम प्रजातियों के विकास के लिए आणविक प्रजनन तकनीकों का उपयोग किया गया है। गेहूं की एचडी 3226 और टमाटर की अर्काबेड क्रमशः सात और चार बीमारियों के लिए प्रतिरोधी हैं।

प्रधानमंत्री ने कृषि जलवायु क्षेत्र की विशेष आवश्यकताओं पर ध्यान केन्द्रित करते हुए प्रजातियों के विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और किसानों को अच्छा लाभ सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन और विपणन सुविधाओं के विकास की जरूरत पर बल दिया।

प्रधानमंत्री ने गन्ना और अन्य फसलों से बायो एथेनॉल बढ़ाने के तरीके तलाशने की संभावनाओं को रेखांकित किया। ‘कुपोषण मुक्त भारत’ को बढ़ावा देने प्रयास में ज्यादा आयरन, जिंक और प्रोटीन सामग्री से युक्त 70 जैव उर्वरक प्रजातियां विकसित की गई हैं। आयरन, पोटेशियम, विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडैंट्स से संपन्न अनार की ऐसी ही एक किस्म भगवा है।

समीक्षा बैठक में कृषि, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री और राज्य मंत्री के अलावा वरिष्ठ अधिकारी, कृषि, पशु पालन और डेयरी तथा मत्स्य पालन विभागों के सचिव भी उपस्थित रहे।

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