जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में दिखे राजनीति के कई रंग, सांसद के दो प्रस्तावों को दिखाया ठेंगा, एक स्वीकृत

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

विनोद श्रीवास्तव, अमृत विचार। जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में शनिवार को राजनीति के कई रंग दिखे। कहीं सदस्यों के अपमान पर सदन दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उनके सम्मान की रक्षा को एकजुट दिखा तो कहीं प्रस्तावों को स्वीकृत करने में राजनीतिक भेदभाव के आरोप भी मढ़े गए। सांसद के तीन में से दो …

विनोद श्रीवास्तव, अमृत विचार। जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में शनिवार को राजनीति के कई रंग दिखे। कहीं सदस्यों के अपमान पर सदन दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उनके सम्मान की रक्षा को एकजुट दिखा तो कहीं प्रस्तावों को स्वीकृत करने में राजनीतिक भेदभाव के आरोप भी मढ़े गए। सांसद के तीन में से दो प्रस्तावों को ठेंगा दिखाया गया।

जिपं की बोर्ड बैठक में एक तरफ जिला पंचायत सदस्यों के द्वारा बिजली विभाग के अधिकारियों पर अपमान का ठीकरा फोड़ते ही पूरे सदन में दलीय सीमा टूट गई। चाहे जिला पंचायत सदस्यों के दल का सवाल हो या विधान परिषद सदस्य व सांसद के अपने खेमे का। सब एकजुट स्वर में जनप्रतिनिधियों के सम्मान की रक्षा के लिए दीवार बनकर अधिकारियों के सामने खड़े हो गए। किसी ने तीखे अंदाज में तो किसी ने समझाने के सहज भाव से निशाना साधा। लेकिन, व्यक्तिगत प्रस्तावों के स्वीकृत पर राजनीतिक तंज भी कसे गए।

समाजवादी पार्टी के मुरादाबाद सांसद डॉ. एसटी हसन ने जब यह सवाल पूछा कि उनके द्वारा कितने प्रस्ताव अभी तक जिला पंचायत को दिए गए हैं, उसकी प्रगति क्या है। इस पर अपर मुख्य अधिकारी शिशुपाल शर्मा ने अभियंता से जवाब देने को कहा। अभियंता के जवाब से सांसद भी असहज हो गए। अभियंता ने सांसद के सवाल के जवाब में कहा कि उनके द्वारा दिए गए अब तक तीन प्रस्ताव में से दो स्वीकार करने लायक नहीं हैं, एक पूरनवाला का प्रस्ताव लिया गया है। विकास खंड डिलारी में नाला निर्माण में पेड़ की अड़चन के चलते प्रस्ताव स्वीकार योग्य नहीं है। बस्ती का पानी निकासी की जगह न होने पर असमर्थता जताई। इस पर सांसद ने कहा कि भाजपा सरकार में बस्ती का पानी नहीं निकाला जाएगा।

एमएलसी ने दिखाया आइना नसीहत संग मरहम भी लगाया
विधान परिषद सदस्य डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त ने जिला पंचायत सदस्यों के अपमान पर एक तरफ जहां अधिकारियों और सदस्यों को आइना दिखाया तो दूसरी तरफ नसीहत भी दी। उन्होंने कहा कि सदस्य अपनी सीमा भी समझें कि पंचायत अधिनियम उनको कहां तक अधिकार देता है। वहीं, अधिकारी यह स्वीकार कर लें कि संविधान में जनप्रतिनिधियों को कानून बनाने का अधिकार भी दिया है। इस लिहाज से उनका सम्मान करना नैतिकता में शामिल है। जिपं के कार्य में हस्तक्षेप पर भी सदस्यों पर तंज कसा, कहा सांसद, विधायक, एमएलसी बोर्ड बैठक में केवल पदेन सदस्य के हैसियत से आते हैं। जिला पंचायत अधिनियम में हमारे द्वारा किसी प्रस्ताव पर न तो विचार किया जा सकता है और काम होता है। हमारे अधिकार भी सदस्य सदन में दिलाएं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि काम भले न करें लेकिन मीठा बोलकर सम्मान तो करें।

ये भी पढ़ें : मुरादाबाद : अपमान पर भड़के जिला पंचायत सदस्य, बोले- बिजली विभाग के अभियंता नहीं मानते जनप्रतिनिधि

संबंधित समाचार