बागेश्वर: एंबुलेंस संचालन में लापरवाही पर नपेंगे नोडल अधिकारी

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बागेश्वर, अमृत विचार। गत दिनों माल्ता में कार दुर्घटना में घायल चालक को हायर सेंटर ले जाते वक्त एंबुलेस चालक के बाद स्वास्थ्य विभाग चेता है। जिलाधिकारी के निर्देश पर सीएमओ ने प्रत्येक विकास खंड में चिकित्साधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है जो कि प्रति माह एंबुलेंस के उपकरणों व सिलेंडर आदि की जांच …

बागेश्वर, अमृत विचार। गत दिनों माल्ता में कार दुर्घटना में घायल चालक को हायर सेंटर ले जाते वक्त एंबुलेस चालक के बाद स्वास्थ्य विभाग चेता है। जिलाधिकारी के निर्देश पर सीएमओ ने प्रत्येक विकास खंड में चिकित्साधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है जो कि प्रति माह एंबुलेंस के उपकरणों व सिलेंडर आदि की जांच करके रिपोर्ट जिलाधिकारी व सीएमओ को देंगे।

बता दें कि विगत सप्ताह माल्ता में एक कार दुर्घटनाग्रस्त हुई थी जिसमें चालक गंभीर रूप से घायल हो गया था। जिसे हायर सेंटर ले जाते वक्त 108 एंबुलेंस की लापरवाही के चलते दो घंटे तक मरीज को बीच जंगल में रूकना पड़ा था। इसकी शिकायत ग्राम प्रधान गणेश रावत ने सीएम हेल्प लाइन तक की थी। इधर, इस मामले को कपकोट के विधायक सुरेश गड़िया, जिलाधिकारी रीना जोशी व सीएमओ डॉ. सुनीता टम्टा ने गंभीरता से लिया है।

सीएमओ ने बताया कि प्रत्येक विकास खंड के प्रभारी चिकित्साधिकारियों को एंबलेंस का नोडल अधिकारी बनाया गया है, जो प्रति माह देखेंगे कि एंबुलेंस के उपकरण की सर्विसिंग हुई है या नहीं तथा उनके द्वारा ऑक्सीजन सिलेंडर भरवाया गया है या नहीं। साथ ही उनके द्वारा चालक व एंबुलेंस की सर्विसिंग, रखरखाव की जानकारी लिखित रूप से लेंगे तथा इसकी सूचना प्रति माह जिलाधिकारी समेत सीएमओ को देनी होगी। सीएमओ ने बताया कि जनपद में 108 एंबुलेंस सेवा के लिए कंपनी द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी रिपोर्ट देंगे जबकि स्वास्थ्य विभाग व दो निजी एंबुलेंस की रिपोर्ट प्रभारी चिकित्साधिकारी देंगे।

गलती होने पर विभाग पर गिरती है गाज
बागेश्वर। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जनपद में एंबुलेंस का संचालन स्वास्थ्य विभाग के अलावा 108 सेवा व दो एंबुलेंस संचालन निजी रूप से किया जाता है। इन एंबुलेंस में भी किसी प्रकार की लापरवाही की गाज स्वास्थ्य विभाग पर ही गिरती है। इस कारण स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन ने इस पर सख्ती का निर्णय लिया है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की शिकायत न हो तथा स्वास्थ्य विभाग समेत सरकार को बदनामी का शिकार न होना पड़े।

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