मुरादाबाद : शास्त्रीय संगीत से भविष्य संवार रहीं रुचि, ढाई माह की उम्र में ही हो गईं थीं पोलियो की शिकार
मुरादाबाद,अमृत विचार। समाज सेवा के जुनून का एक नाम है रुचि चतुर्वेदी। इस जुनून के आगे उन्होंने अपनी दिव्यांगता को भी आड़े नहीं आने दिया। बचपन में ही पोलियो से दोनों पैर खराब होने के बावजूद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आर्थिक विषमताओं के बाद भी एमए और एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। इसके साथ …
मुरादाबाद,अमृत विचार। समाज सेवा के जुनून का एक नाम है रुचि चतुर्वेदी। इस जुनून के आगे उन्होंने अपनी दिव्यांगता को भी आड़े नहीं आने दिया। बचपन में ही पोलियो से दोनों पैर खराब होने के बावजूद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आर्थिक विषमताओं के बाद भी एमए और एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। इसके साथ ही म्यूजिक में प्रभाकर की उपाधि हासिल की। वह युवतियों को शास्त्रीय संगीत की शिक्षा देकर भविष्य भी संवार रही हैं।
रेलवे हरथला कालोनी निवासी रुचि चतुर्वेदी के पिता रेलवे में लोको पायलट थे। उनकी 26 साल पूर्व मौत हो गई थी। रुचि जब मात्र ढाई माह की थी तभी पोलियो से उनके दोनों पैर खराब हो गए। पिता की मौत के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई। तब रुचि के चाचा महेश चंद्र चतुर्वेदी ने उनके परिवार की आर्थिक मदद की।
वह कहती हैं कि उन्हें बचपन से ही समाज सेवा करने का जुनून था। वह कालोनी में रहने वाले लोगों की मदद के लिए हमेशा सबसे आगे रहती थीं। मां प्रतिभा, बड़ी बहन दीपमाला और छोटे भाई निशांत चतुर्वेदी ने उन्हें कभी महसूस ही नहीं होने दिया कि वह दिव्यांग हैं। छोटे भाई ने उनकी पढ़ाई पूरी करने के लिए अपनी पढ़ाई छोड़ दी।
उन्होंने लड़कियों को शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दी। बुटीक खोलकर सिलाई-कढ़ाई भी सिखाई। आज भी वह इसी जज्बे के साथ समाज की सेवा कर रही हैं। किसी जानने वाले का कोई काम हो और रुचि सबसे आगे न खड़ी हो ऐसा नहीं हो सकता। गुरुवार को भी वह पूरे दिन ऐसे ही एक परिचित का काम कराने के लिए पहले कचहरी और फिर तहसील में जुटी रहीं। वह भले ही बैशाखियों के सहारे चलती हैं मगर उनके हौसले आसमान छूने के लिए बेताब हैं।
शहर की यह बेटी उन युवतियों के लिए मिसाल हैं जो जरा सी शारीरिक कमजोरी से घबरा जाती हैं। ऐसी युवतियों के लिए रुचि चतुर्वेदी प्रेरणा का स्रोत हैं।
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