कानपुर हादसा : हैलट में शव पहुंचते ही मची अफरा-तफरी, इलाज के दौरान कई ने तोड़ा दम

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

अमृत विचार, कानपुर: हादसे के बाद कानपुर के हैलट अस्पताल में घायलों को इलाज के लिए एंबुलेंस के जरिए भेजा गया। करीब 9.30 बजे रात में एक साथ कई घायल जैसे ही अस्पताल परिसर में प्रवेश किए अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल प्रशासन ने मेन गेट को बंद कर दिया। पुलिस प्रशासन के आलावा किसी के …

अमृत विचार, कानपुर: हादसे के बाद कानपुर के हैलट अस्पताल में घायलों को इलाज के लिए एंबुलेंस के जरिए भेजा गया। करीब 9.30 बजे रात में एक साथ कई घायल जैसे ही अस्पताल परिसर में प्रवेश किए अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल प्रशासन ने मेन गेट को बंद कर दिया। पुलिस प्रशासन के आलावा किसी के अंदर आने पर रोक लगा दी। यहां घायलों के परिजन भी मौके पर बदहवास नजर आए। एक के बाद एक कई एंबुलेंस पहुंचने से हैलट का माहौल भी गमगीन हो गया।

खबर लिखे जाने तक तीन गंभीर घायलों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। घटना के बाद से लगातार मृतकों की संख्या बढ़ती जा रही है। अभी एक दर्जन से ज्यादा घायलों को इलाज डॉक्टरों की टीम कर रही है। बताया जा रहा है कि कई लोगों की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।

घाटमपुर में हुए हादसे के बाद जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो.संजय काला ने मेडिकल कॉलेज के आपदा प्रबंधन की टीम को बुला लिया है। सर्जरी, ऑर्थो और न्यूरो के वार्ड को खाली कराया जा रहा है। इमरजेंसी में सर्जरी, न्यूरो सर्जरी और ऑर्थो विभाग के डॉक्टर, जूनियर डॉक्टर तैनात हो गए हैं। ऑपेरशन थियेटर को तैयार किया जा रहा है। पुलिस की ओर से सड़क को खाली कराया गया है। कमिश्नरेट पुलिस और आउटर पुलिस के अधिकारी हैलट अस्पताल पहुंचे।

मुंडन संस्कार से लौट रहे थे सभी

कोरथा के रहने वाले राजू निषाद अपने बच्चे का मुंडन कराने रिश्तेदारों संग चंद्रिका देवी मंदिर गए थे। राजू ही ट्रैक्टर चला रहा था। घटना के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बताया जा रहा है कि तीन चार जो लोग कूद गए, वो ही बचे हैं। बाकी लोग दबे हुए हैं। हादसे में माता-पिता और जिस बच्चे का मुंडन था, उनकी भी मौत हो गई है।

तैरना नहीं जानते थे डूबकर हो गई मौत

घाटमपुर के साढ़ थानाक्षेत्र में हुई घटना के बाद चीख-पुकार मच गई। भरे पानी में डूबने से अधिकतर लोगों ने दम तोड़ दिया। मृतकों में अधिकतर महिलाएं और बच्चे थे जिससे घटना के बाद उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला। हादसे की सूचना पर पहले स्थानीय लोगों ने बचाव कार्य शुरू किया।

अंधेरा होने की वजह से लोगों को पानी से लोंगों को निकालने में खासा दिक्कत आई। लोग टॉर्च और वाहनों की रोशनी में राहत कार्य करते रहे। पुलिस अधिकारियों ने हैलट समेत अन्य अस्पतालों और 108 से एम्बुलेंस के लिए बुलवाया। एक दर्जन एम्बुलेंस मौके पर पहुंची और वहां से घायलों को लेकर सीएचसी और हैलट अस्पताल भिजवाया गया। अभी तक 5 बच्चियां, दो बच्चें और शेष महिलाओं की मौत की पुष्टि हुई है।

डॉक्टर न होने पर हैलट में हंगामा

हादसे के बाद हैलट अस्पताल में डॉक्टरों की कमी देखी गई। घायलों को इलाज न मिलने पर परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा कर दिया। पुलिस और अन्य प्रशासन के अधिकारी उन्हें समझाते रहे। अपनों को आंखों के सामने तड़पता देख लोगों के आंसू बहना बंद नहीं हो रहे थे। आनन-फानन में जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों को भी हैलट में मदद के लिए बुलाया गया।

हाथ थामे हुए कईयों ने तोड़ दिया दम

हैलट में घायलों का समय से इलाज न होने पर कईयों ने दम तोड़ दिया। अपने आखों के सामने तड़पते लोगों को देख परिजनों के आंसू नही थम नहीं रहे थे। पीड़ित सीमा ने राते हुए कहा कि डॉक्टरों ने मेरे बेटो को मार डाला, वहीं कई और परिजन भी अपनों के शवों को देखकर चित्कार करते रहे।

सड़क के गड्ढे से अनियंत्रित हो गई ट्रैक्टर ट्राली

प्रत्यक्षदर्शी कृपाशंकर यादव ने बताया कि मुंडन कराने के बाद आ रहे थे। हादसे से पहले सभी ने एक जगह नाश्ता किया है। उसके बाद ट्रैक्टर ट्राली में सवार होकर सभी घर के लिए निकले। ट्रैक्टर ट्राली थोड़ी दूर ही चली थी। रास्ते में गड्ढ़े की वजह से ट्राली अनियंत्रित हो गई और ट्रैक्टर और ट्राली दोनों ही पलट गई।

ग्रामीण अंकित ने बताया कि जब ड्राइवर ने नाश्ते के लिए ट्रैक्टर ट्राली को रोका था तो इसदौरान ड्राइवर समेत ट्राली में सवार कई लोगों ने शराब पी थी। कुछ देर चलने के बाद ट्रैक्टर लहराया भी जिसपर लोगों ने ड्राइवर से धीमे गाड़ी चलाने की बात भी कही थी। लेकिन कुछ दूर बाद ट्रैक्टर ट्राली अनियंत्रित होकर और पानी में समा गई।

ग्रामीणों ने किया हंगामा

हादसे के बाद ग्रामीणों की भीड़ एकत्र हो गई। जिसके बाद कुछ ग्रामीणों ने मुआवजे की कम राशि की घोषणा पर विरोध करते हुए हंगामा किया। ग्रामीणों का कहना था कि मृतकों को कम से कम पांच लाख रुपये और घायलों को दो लाख रुपये देने की मांग की।

घटना के बाद सभी यात्री गहरे पानी में डूब गए थे। जिसमें से ग्रामीणों ने लोगों को बाहर निकालना शुरू किया। 27 लोगों के शव निकालने के बाद भी एक लड़की को देर रात तक ग्रामीण तलाशते रहे। अंधेरा और पानी की वजह से लड़की को खोजने में दिक्कत आ रही थी।

यह भी पढ़ें :- कानपुर हादसा : श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली पलटी, 27 लोगों की मौत, कई लोग गंभीर

 

 

 

 

संबंधित समाचार