बाराबंकी : सपा-भाजपा के गढ़ में सियासी जमीन तलाशती नजर आई अनुप्रिया
अमृत विचार बाराबंकी। अपना दल (एस)की राष्ट्रीय अध्यक्ष केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल रविवार को यहां सियासी जमीन तलाशने पहुंची। कुर्मी बाहुल्य जिला होने के हमेशा से ही बाराबंकी टिकी रही है। लेकिन पूर्व में यहां बेनी प्रसाद वर्मा जैसे कद्दावर नेता की मौजूदगी के चलते उनके पिता सोनेलाल पटेल की भी दाल …
अमृत विचार बाराबंकी। अपना दल (एस)की राष्ट्रीय अध्यक्ष केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल रविवार को यहां सियासी जमीन तलाशने पहुंची। कुर्मी बाहुल्य जिला होने के हमेशा से ही बाराबंकी टिकी रही है। लेकिन पूर्व में यहां बेनी प्रसाद वर्मा जैसे कद्दावर नेता की मौजूदगी के चलते उनके पिता सोनेलाल पटेल की भी दाल यहां कभी नहीं गली।
रविवार को यहां उन्होंने गांधी जयंती समारोह ट्रस्ट के अध्यक्ष राजनाथ शर्मा द्वारा गांधी भवन पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। महात्मा गांधी के साथ-साथ उन्होंने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। एक निजी लान पर आयोजित कार्यक्रम में पार्टी के सदस्यता अभियान की शुरुआत की, जहां संगठनात्मक ढांचे की कमी साफ नजर आई। सोनेलाल पटेल ने अपने समय में जो यहां संगठनात्मक ढांचा खड़ा किया था वह उनके न रहने के बाद पार्टी में विभाजन के चलते ध्वस्त हो चुका है।
अब पार्टी के इक्का-दुक्का नेता ही अपना दल एस के साथ रह गए हैं। कुर्मी मतदाताओं पर अभी भी बेनी प्रसाद वर्मा के परिवार का प्रभाव है। जो उनके परिवार के साथ नहीं है। वह भाजपा में हैं। ज्यादातर कुर्मी नेताओं की भीड़ भाजपा में ही नजर आ रही है। ऐसे में अनुप्रिया पटेल के लिए भाजपा से कुर्मी मतदाताओं का मोह भंग कराना कठिन ही नहीं नामुमकिन जैसा प्रतीत होता है। हालांकि उन्होंने कहा कि वह 4 बार भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ चुकी हैं और आगे भी भाजपा के साथ ही मिलकर चुनाव लड़ेंगी
सदस्यता अभियान के समापन के अवसर पर कार्यकर्ताओं से मुखातिब केंद्रीय मंत्री ने देश में न्यायिक आयोग और पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की मांग की। श्रीमती पटेल ने कहा कि समाज के दबे कुचले वर्ग से भी आज़ादी के दीवाने पैदा हुए, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। आज जरूरत है नई पीढ़ी को इन महान क्रांतिकारियों वीरांगना उदा देवी पासी, वीरांगना झलकारी बाई, वीरांगना अहिल्याबाई होल्कर, वीरांगना अवंतीबाई लोधी के बारे में जानने और उनसे प्रेरणा लेने की। इन महान वीरांगनाओं की वीरगाथा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए।
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