कानपुर: वाल्मीकि की करुणा प्रकट से हिन्दू समाज को मिले राम- भागवत
कानपुर, अमृत विचार। महर्षि वाल्मीकि की करुणा प्रकट से हिन्दू समाज को राम मिले हैं। वे रामायण नहीं लिखते तो हमें राम को पूजने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हो पाता। इन शब्दों के साथ अपने 25 मिनट के वक्तव्य में मोहन भागवत ने मंच से वाल्मीकि समाज सहित पूरे हिन्दू समाज को करुणामयी और अपनेपन …
कानपुर, अमृत विचार। महर्षि वाल्मीकि की करुणा प्रकट से हिन्दू समाज को राम मिले हैं। वे रामायण नहीं लिखते तो हमें राम को पूजने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हो पाता। इन शब्दों के साथ अपने 25 मिनट के वक्तव्य में मोहन भागवत ने मंच से वाल्मीकि समाज सहित पूरे हिन्दू समाज को करुणामयी और अपनेपन की सीख दी।
रविवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर समाज की ओर से नानाराव पार्क में आयोजित कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख 11:38 बजे से बोलना शुरू किया। कहा कि क्रोंच पक्षी के मरने पर जब वाल्मीकि में करुणा प्रकट हुई उसी के बाद ऐसे ही करुणामयी चरित्र राम को हम जान सके। उनकी लिखी रामायण हमें बहुत कुछ सिखाती है। करुणा धर्म का एक पैर है। हमें शत्रुता व्यवहार से दूर करती है, अपनेपन को बढ़ाती है, लड़ने की क्षमता देती है, कामयाब बनाती है। रामायण से हम सीखते हैं कि केवल तपस्या से नहीं आत्मीयता से सफलता अच्छी होती है। उन्होंने समाज के लोगों को संघ से जुड़ने का भी आवाह्न किया।
उन्होंने कहा कि संघ की शाखा में जाकर कार्यकर्ताओं से दोस्ती करें, जुड़ें और फिर एक दिन वह आएगा हर समाज वाल्मीकि महोत्सव मनाएगा। उन्होंने संस्कृत और बंगला भाषा में श्लोक कहकर व फिर हिंदी अनुवाद कर समाज को उत्साहित किया।
महर्षि वाल्मीकि के सीता को बेटी की तरह रखने और लवकुश के अस्त्रशस्त्र ज्ञान के उदाहरणों को कहकर सीख देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि नशा व किसी भी प्रकार की बुरी आदतों को छोड़कर ही हम मानव स्वभाव के अनुरूप आगे बढ़ने में भूमिका निभा सकते हैं। अपने पुरुषार्थ से मानव अतिमानव और देव बनने की सीख देकर संघ प्रमुख ने 12:03 बजे अपना वक्तव्य पूरा किया
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