राजनीति के लिए बड़ी क्षति

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समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव के निधन से उत्तर प्रदेश की राजनीति पर गहरे असर होंगे, इसमें दो राय नहीं। मुलायम सिंह ने मूल्यों की राजनीति की थी और राममनोहर लोहिया तथा जयप्रकाश नारायण के सिद्धांतों पर काम किया था। एक शिक्षक के रूप में जिंदगी की पारी शुरू करने वाले श्री यादव ने उत्तर …

समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव के निधन से उत्तर प्रदेश की राजनीति पर गहरे असर होंगे, इसमें दो राय नहीं। मुलायम सिंह ने मूल्यों की राजनीति की थी और राममनोहर लोहिया तथा जयप्रकाश नारायण के सिद्धांतों पर काम किया था। एक शिक्षक के रूप में जिंदगी की पारी शुरू करने वाले श्री यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और भारत के रक्षामंत्री के पद को सुशोभित किया था।

नेताजी के नाम से मशहूर मुलायम सिंह यादव की विशेषता थी कि वे अपने सिद्धांतों के साथ कभी समझौता नहीं करते थे। नेताजी अक्सर कहा करते थे कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने उनके भीतर छिपी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें अपना आशीर्वाद प्रदान किया था। नेताजी की विशेषता थी कि वे जिन सोपानों पर चढ़कर ऊपर पहुंचते थे, उन्हें हमेशा याद रखते थे और उसका आदर करते थे।

राजनीति के क्षेत्र में उन्होंने धर्मनिरपेक्षता और समाजवादी मूल्यों की स्थापना की। वे समाजवादी नत्थू सिंह को अपना गुरू मानते थे और उन्हीं की प्रेरणा से 1967 में पहली बार 28 वर्ष की आयु में प्रदेश के सबसे युवा विधायक चुने गए थे। विधायक के रूप में ही उनकी ख्याति एक कद्दावर समाजवादी नेता के रूप में फैलने लगी थी। वे तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और प्रदेश के विकास को नई दिशा दी थी।

समाज के पिछड़ावर्ग के लिए काफी कार्य किया था। तमाम मिथक के बावजूद कहा जा सकता है कि नेताजी किसी खास जाति या वर्ग तक सीमित नहीं थे। सभी उनका समान आदर करते थे। वह समाज के निचले पायदान पर खड़े आदमी को उसकी प्रतिभा देखकर बड़ी से बड़ी जिम्मेदारी सौंप दिया करते थे। 1990 में अयोध्या गोलीकांड को लेकर मुलायम सिंह यादव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गए थे।

1992 में उन्होंने समाजवादी पार्टी बनाई जो एक समय प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी रही। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुलायम सिंह यादव की अनुपस्थिति का अहसास लंबे समय तक रहेगा। उन्होंने जिस तरीके से समाज के कमजोर तबके को एक किया था और अल्पसंख्यकों का विश्वास हासिल किया था उसने प्रदेश की राजनीति को एक नया समीकरण प्रदान किया था। वर्तमान परिदृश्य में प्रदेश की राजनीति ने अपने आपको भले ही नए समीकरणों के साथ जोड़ लिया हो, नेताजी का फार्मूला आज भी लोगों के दिमाग में है।