विश्व बालिका दिवस: बालिकाएं आज भी मौलिक अधिकारों से वंचित
बांदा, अमृत विचार। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव बीडी गुप्ता की अध्यक्षता में आर्यकन्या इंटर कॉलेज में विश्व बालिका दिवस पर लैंगिक समानता, हाईजीन व सैनेटरी नैपकिन के संबंध में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन हुआ। वक्ताओं ने कहा कि विश्व की तरक्की के बीच बालिकाएं आज …
बांदा, अमृत विचार। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव बीडी गुप्ता की अध्यक्षता में आर्यकन्या इंटर कॉलेज में विश्व बालिका दिवस पर लैंगिक समानता, हाईजीन व सैनेटरी नैपकिन के संबंध में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन हुआ। वक्ताओं ने कहा कि विश्व की तरक्की के बीच बालिकाएं आज भी अपने मौलिक अधिकारों से वंचित हैं।
अध्यक्ष स्थायी लोक अदालत कमलेश दुबे ने लैंगिक समानता के संबंध में बोलते हुए कहा कि सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक प्रगति के बावजूद भारतीय समाज में पितृ सत्तात्मक मानसिकता जटिल रूप में व्याप्त है, जिस कारण से बालिकाओं और महिलाओं को आज भी जिम्मेदार समझा जाता है। महिलाओं व बालिकाओं को सामाजिक और पारिवारिक रूढ़ियों के कारण विकास के अवसर कम मिलते हैं, जो उनके व्यक्तित्व के पूर्ण विकास में बाधा उत्पन्न करता है।
सबरीमाला और तीन तलाक जैसे मुद्दों पर सामाजिक मतभेद पितृ सत्तात्मक मानसिकता को प्रतिबिंबित करता है। भारत में आज भी व्यवहारिक और वैधानिक स्तर पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार संपत्ति पर महिलाओं का समान अधिकार है, लेकिन पारिवारिक संपत्ति पर महिलाओं का अधिकार प्रचलन में नहीं है। इसलिये उनके साथ विभेदकारी व्यहार किया जाता है। वर्तमान में अब समाज की मानसिकता में धीरे-धीरे परिवर्तन आ रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर गंभीरता से विमर्श किया जा रहा है।
लैंगिक समानता का सूत्र श्रम सुधारों और सामाजिक सुरक्षा कानूनों से भी जुड़ा है फिर चाहे कामकाजी महिलाओं के लिये समान वेतन सुनिश्चित करना हो या सरकारी, गैर सरकारी क्षेत्रों में लागू है। उन्हें निजी और असंगठित क्षेत्रों में भी सख्ती से लागू करना होगा। जेंडर बजटिंग और सामाजिक सुधारों के एकीकृत प्रयास से ही भारत को लैंगिक असमानता के बंधनों से मुक्त किया जा सकता है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव बीडी गुप्ता ने विश्व बालिका दिवस पर लैंगिक समानता, हाईजीन और सैनेटरी नैपकिन के संबंध में कहा कि विश्व की तरक्की के बीच बालिकाएं आज भी अपने मौलिक अधिकारों से वंचित है। सांस्कृतिक बाधाएं, शिक्षा की कमी, सुरक्षा के मुद्दे और बहुत सी चुनौतियां हैं, जिनसे बालिकाएं आज भी लड़ रही हैं।
इन चुनौतियों को प्रकाश में लाने के लिये विश्व भर में यह दिवस मनाया जाता है। लोक अदालत के स्थायी सदस्य रामप्रताप गुप्ता, प्राविधिक स्वयंसेवक रूबी जैनब और सुमन शुक्ला, प्रधानाचार्या आर्यकन्या इंटर कॉलेज पूनम गुप्ता आदि ने महिला अधिकारों पर प्रकाश डाला। शिविर में साहिस्ता सिद्दीकी, शशिप्रभा, समीक्षा खरे, शाहिद अहमद, खुर्शीद अहमद, बुशरा, अशोक त्रिपाठी, नदीम अनवर, अंकुर गुप्ता, मुसाब अहमद आदि मौजूद रहे।
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