कुपोषण से निपटने के लिए लखनऊ के इस विश्वविद्यालय ने उठाया ये जरूरी कदम
लखनऊ। समाज में कुपोषण की समस्या को देखते हुए लखनऊ के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय (Khwaja Moinuddin Chishti Language University) ने अहम कदम उठाया है। विश्वविद्यालय के पहल पर कुलपति प्रो एनबी सिंह ने फ्लोरा फौना साइंस फाउंडेशन के मध्य एक एमओयू साइन किया है। विश्वविद्यालय की ओर से डॉ भावना मिश्रा, रजिस्टार एवं …
लखनऊ। समाज में कुपोषण की समस्या को देखते हुए लखनऊ के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय
(Khwaja Moinuddin Chishti Language University) ने अहम कदम उठाया है। विश्वविद्यालय के पहल पर कुलपति प्रो एनबी सिंह ने फ्लोरा फौना साइंस फाउंडेशन के मध्य एक एमओयू साइन किया है। विश्वविद्यालय की ओर से डॉ भावना मिश्रा, रजिस्टार एवं परीक्षा नियंत्रक, भाषा विश्वविद्यालय तथा फ्लोरा फौना फाउंडेशन की ओर से प्रो सुमन खनुजा अध्यक्ष, फ्लोरा फौना साइंस फाउंडेशन ने इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए। विश्वविद्यालय की ओर से डॉ नलिनी मिश्रा समन्वयक, महिला अध्ययन केंद्र इसकी समन्वयक होंगी । इस मौके पर प्रो एनबी सिंह ने कहा की एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है और विद्यार्थियों को विशेषकर, छात्राओं को संतुलित आहार पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
कुपोषण को देंगे मात
विश्वविद्यालय की प्रवक्ता डॉ तनु डंग ने बताया कि इस एमओयू के जरिए अलग अलग स्कूलों, कॉलेजों तथा विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों में “न्यूट्री पाठशाला” नामक शैक्षिक शिविर लगाए जाएंगे, तथा विश्वविद्यालय में ‘न्यूट्रीवाटिका’ स्थापित की जाएगी। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय का महिला अध्ययन केंद्र एवं फ्लोरा फौना फाउंडेशन ‘न्यूट्री थाली’ को लोकप्रिय बनाने पर भी साथ काम करेंगे।
ईको एग्रीकल्चर को भी मिलेगा बढ़ावा
विश्वविद्यालय में स्थापित एनएसएस तथा एनसीसी की शाखाएं फाउंडेशन की मदद से कृषकों एवं उद्यमियों के मध्य जाकर जागरूकता बढ़ाएगेतथा जैविक खाद का प्रचार प्रसार करेंगे। इसके साथ साथ महिला उद्यमिता के क्षेत्र में भी विशेष कार्य किया जाएगा। डॉ सुमन खनुजा के साथ विश्वविद्यालय कुलपति ने परिसर का भ्रमण किया तथा न्यूट्रीवाटिका की स्थापना एवं जैविक कृषि के लिए सुयोग्य जगह भी चिन्हित की।
