डेंगू का दंश : इलाज के दौरान बच्ची समेत दो की मौत

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अमृत विचार, बांदा। लगातार हो रही बारिश से संक्रामक बीमारियां बढ़ने लगी है। जगह-जगह भरे पानी के गड्ढों और गंदगी से बजबजा रही नालियों से मच्छर जनित बीमारियां बढ़ने लगी हैं। डेंगू के डंक से आए दिन कोई न कोई काल के गाल में समा जाता है। जिला अस्पताल में इसकी जांच भी नहीं हो …

अमृत विचार, बांदा। लगातार हो रही बारिश से संक्रामक बीमारियां बढ़ने लगी है। जगह-जगह भरे पानी के गड्ढों और गंदगी से बजबजा रही नालियों से मच्छर जनित बीमारियां बढ़ने लगी हैं। डेंगू के डंक से आए दिन कोई न कोई काल के गाल में समा जाता है। जिला अस्पताल में इसकी जांच भी नहीं हो पा रही। मरीजों को जांच कराने के लिए बाहर प्राइवेट पैथालाजियों का सहारा लेना पड़ता है। डेंगू से पीड़ित एक बालिका समेत दो लोगों की मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई थी। लेकिन कोई भी अधिकारी यहां झांकने नहीं आया।

जिले में डिप्थीरिया के साथ अब डेंगू ने भी दस्तक दे दी है। बुखार से लगातार लोगों की प्लेटलेट कम हो रही है। चिकित्सक भी प्लेटें कम होने पर लोगों को उचित सलाह दे रहे हैं। जिले की पीएचसी और सीएचसी में भी भीड़ बढ़ रही है। मरीज के तीमारदार अपने मरीजों का प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। कमासिन पीएचसी के अंतर्गत नरायनपुर गांव में डेंगू ने दस्तक दे दी है। गुड़िया (8) पुत्री ओमप्रकाश वर्मा कई दिनों से बुखार से पीड़ित थी। पिता ने सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में उसका इलाज कराया। हालत में सुधार न होने पर परिजन उसे मंगलवार को प्रयागराज के एक अस्पताल में भर्ती कराया।

वहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। वहीं श्यामसुंदर (45) पुत्र लक्ष्मीकांत कई दिनों से बुखार से पीड़ित था। परिजनों ने उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कमासिन में भर्ती कराया। वहां चिकित्सकों ने डेंगू की आशंका जताते हुए रेफर कर दिया था। परिजन प्रयागराज के एक अस्पताल में भर्ती कराया। वहां बुधवार की सुबह उसने भी दम तोड़ दिया।

ग्राम प्रधान सुनील सिंह यादव ने बताया कि गांव में संक्रामक बीमारियां फैली हुई हैं। इसके अलावा डेंगू ने भी दस्तक दे दी है। स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को सूचना दे दी गई है। लेकिन अभी तक कोई भी अधिकारी नहीं आया है न ही लार्वा निरोधक का छिड़काव किया गया है। बाल रोग विशेषज्ञ एसआर वर्मा ने बताया कि इस समय दो दिन से ज्यादा बुखार आने पर चिकित्सक की देखरेख में ही इलाज करवाएं क्योंकि इस समय बुखार में प्लेटलेट्स बहुत तेजी से कम हो रही हैं। इससे बचाव के लिये कही पर भी पानी का भराव न होने दे और मच्छरों से बचने के उपाय करें।

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